MP में अमित शाह का दौरा: बीजेपी की 22 प्रतिशत आदिवासी वोट बैंक साधने की कोशिश, 7 माह में तीसरा बढ़ा कार्यक्रम

 सार

भोपाल में शुक्रवार को वन समितियों का सम्मेलन कार्यक्रम आयोजित किया गया है। प्रदेश में 7 माह में आदिवासियों को लेकर यह तीसरा बड़ा कार्यक्रम है। माना जा रहा है कि बीजेपी आगामी 2023 के चुनाव से पहले 22 प्रतिशत आदिवासी वोट साधने की कोशिश कर रही है।



जंबूरी मैदान में अमित शाह कार्यक्रम में भाग लेंगे

केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह एक दिवसीय दौरे पर शुक्रवार को राजधानी भोपाल में रहेंगे। शाह जंबूरी मैदान में तेंदूपत्ता संग्राहक सम्मेलन में भाग लेंगे। प्रदेश में 7 माह में आदिवासियों को लेकर यह तीसरा बड़ा कार्यक्रम है। माना जा रहा है कि बीजेपी आगामी 2023 के चुनाव से पहले 22 प्रतिशत आदिवासी वोट साधने की कोशिश कर रही है।

विधानसभा चुनाव 2018 के परिणाम के बाद बीजेपी को आदिवासी वोट की ताकत का अंदाजा हो गया है। यही वजह है कि 7 माह पूर्व सितंबर 2021 में अमित शाह जबलपुर में राजा शंकरशाह-कुंवर रघुनाथ शाह के 164वें बलिदान दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इसके बाद जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल आए। उन्होंने हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम गौंड रानी कमलापति के नाम पर किया। अब अमित शाह तेंदूपत्ता संग्राहक सम्मेलन में भाग लेने आ रहे हैं। जहां वन ग्राम समितियों को राजस्व ग्राम में बदलने का शुभारंभ होगा। जंबूरी मैदान में एक लाख से अधिक वन समितियों के सदस्य सम्मलित होंगे। कार्यक्रम में तेंदूपत्ता संग्राहकों को 70 करोड़ रुपये का बोनस भी बांटा जाएगा।

2023 चुनावों की तैयारी 

प्रदेश में आदिवासियों के तीसरे बड़े कार्यक्रम को बीजेपी की 2023 के चुनाव की तैयारियों के रूप में देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश में आदिवासी (अनुसूचित जनजाति) वर्ग के लिए 47 सीटें हैं। इसके अलावा सामान्य वर्ग की 31 सीटें ऐसी हैं, जहां आदिवासी वोटर निर्णायक हैं। 2018 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को बहुमत नहीं मिल सका था तो कहीं न कहीं उसका कारण आदिवासी सीटों पर होल्ड गंवाना था। रिजर्व 47 सीटों में 2013 में भाजपा के पास 32 सीटें थी, जो 2018 में घटकर 16 रह गई थीं। 

 क्यों महत्वपूर्ण है मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी

2011 की जनगणना के मुताबिक मध्य प्रदेश में 43 आदिवासी समूह हैं। प्रदेश में आदिवासियों की आबादी 2 करोड़ से ज्यादा है, जो 230 में से 84 विधानसभा सीटों पर असर डालती है। इनमें सबसे ज्यादा आबादी भील-भिलाला करीब 60 लाख, तो गोंड जनजाति की आबादी करीब 50 लाख है। कोल 11 लाख, तो कोरकू और सहरिया करीब छह-छह लाख हैं। करीब 10 साल बाद ये आंकड़े काफी हद तक बदल चुके हैं। 


साभार - अमर उजाला


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