जिले की शिक्षा व्यवस्था को तकनीक और नवाचार से जोडऩे की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मिली है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (पीएमश्री) योजना के तहत छतरपुर जिले के अब 17 स्कूल इस विशेष योजना में शामिल हो गए हैं। पहले 11 स्कूलों को योजना में चुना गया था और अब छह और स्कूलों को इसमें जोड़ा गया है।
क्या है पीएमश्री योजना
भारत सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना देशभर के चुने गए सरकारी स्कूलों को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित करने के लिए चलाई जा रही है। इस योजना के तहत प्रत्येक चयनित स्कूल को हर वर्ष 40 लाख रुपए की राशि दी जाएगी, जिससे स्कूलों को अत्याधुनिक सुविधाएं दी जा सकें।
छतरपुर जिले में अब ये सुविधाएं मिलेंगी
सभी 17 स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक कंप्यूटर लैब, स्मार्ट खोज प्रयोगशाला, बच्चों के लिए खेल-सामग्री, मासिक स्वास्थ्य परीक्षण और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से हर स्कूल में पौधारोपण कर ईको-फ्रेंडली परिसर का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों को ऑब्जर्वेशन बेस्ड लर्निंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा, यानी छात्र प्रयोगों और परियोजनाओं के जरिए समझकर सीखेंगे।
शहर और ग्रामीण इलाकों के ये स्कूल शामिल
योजना में चयनित स्कूलों की सूची में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र दोनों शामिल हैं। केंद्रीय विद्यालय छतरपुर , हायर सेकंडरी स्कूल क्रमांक-2 (छतरपुर),हाई स्कूल कदारी, गल्र्स हायर सेकंडरी स्कूल (नौगांव),हाई स्कूल चुरवारी,हायर सेकंडरी स्कूल घुवारा,मिडिल स्कूल क्रमांक-3 (लवकुशनगर),हाई स्कूल बंजारी, सोरखी,हायर सेकंडरी स्कूल गौरिहार, बाजना, दरगुवां, खड्डी, टटम और मिडिल स्कूल मऊखेरा, सेंधपा को पीएमश्री स्कूल बनाया गया है।
प्राकृतिक शिक्षा का भी होगा समावेश
सिर्फ डिजिटल और तकनीकी विकास ही नहीं, इन स्कूलों को हरित विद्यालय बनाने की भी योजना है। प्रत्येक स्कूल परिसर में सघन पौधरोपण कराया जाएगा। बच्चों को प्रकृति से जुड़ाव, पर्यावरण की सुरक्षा, और जलवायु संतुलन के प्रति जिम्मेदारी भी सिखाई जाएगी।
सरकारी स्कूलों में फिर से लौटे भरोसा
जहां राज्य सरकार सांदीपनि सीएम राइज स्कूल मॉडल के जरिए बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा देने की दिशा में काम कर रही है, वहीं केंद्र सरकार का यह पीएमश्री मॉडल सरकारी स्कूलों की साख और गुणवत्ता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि जैसे-जैसे ये स्कूल उन्नत होंगे, अभिभावकों का भरोसा बढ़ेगा और निजी स्कूलों से मुकाबले में सरकारी स्कूल फिर से पसंद बनेंगे।
साभार : पत्रिका
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