Jhansi: गोविंद सागर बांध अब सालभर रहेगा लबालब, सिंचाई और पेयजल दोनों के लिए मिलेगी राहत

झांसी जिले का गोविंद सागर बांध, जो वर्ष 1952 में साइफन प्रणाली पर बना था, अब किसानों और शहरवासियों दोनों के लिए जीवनरेखा साबित होने जा रहा है। अब तक इस बांध में पानी भंडारण की क्षमता 96.84 एमसीएम होने के बावजूद गर्मी और रबी सीजन में पानी की कमी से किसानों को सिंचाई में दिक्कत होती थी। नहरों में पानी सीमित दिनों तक ही छोड़ा जाता था, जिससे टेल तक पानी पहुंचने में बाधा आती थी और किसानों को बोआई में इंतजार करना पड़ता था।

अब केन-बेतवा लिंक परियोजना इस तस्वीर को बदल देगी। इस योजना के तहत बेतवा नदी से 56 एमसीएम अतिरिक्त पानी लिफ्ट कर आरसीसी कैनाल के जरिए गोविंद सागर बांध तक पहुंचाया जाएगा। यह आपूर्ति पांच चरणों में होगी—नवंबर से मार्च तक हर महीने अलग-अलग मात्रा में पानी बांध तक लाया जाएगा। इस वजह से बांध सालभर लबालब रहेगा और नहरों का संचालन बिना रुकावट के संभव हो सकेगा।

किसानों के लिए लाभ:

नहरों से पानी अब लगातार टेल तक पहुंचेगा, जिससे लगभग 18 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित हो सकेगी। गेहूं, चना और सरसों जैसी रबी की प्रमुख फसलें समय पर सिंचाई मिलने से बेहतर पैदावार देंगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और उनका बोआई-बुआई का चक्र भी नियमित हो पाएगा।

शहरवासियों के लिए राहत:

सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि शहर की पेयजल परियोजनाओं को भी इसका फायदा मिलेगा। अब तक गर्मी के मौसम में शहर में पानी की किल्लत आम बात थी, लेकिन अतिरिक्त पानी मिलने से पेयजल आपूर्ति भी सुचारू रहेगी।

गोविंद सागर बांध में सालभर पर्याप्त पानी रहने से किसानों और आम नागरिकों की दशकों पुरानी समस्या का हल निकलेगा। यह योजना न केवल झांसी की कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाएगी बल्कि आम जनता के जीवनस्तर में भी सकारात्मक बदलाव लाएगी।

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