झांसी में जीएसटी हेराफेरी का बड़ा मामला उजागर हुआ है। फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर बनाई गई एक फर्म ने न केवल पंजीयन कराया बल्कि सरकार को 77.77 लाख रुपये का चूना भी लगा दिया। मामला सामने आने के बाद राज्य कर विभाग ने जांच की, जिसमें फर्म पूरी तरह फर्जी निकली।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
राज्य कर विभाग की एसआईबी टीम की जांच में पता चला कि संबंधित फर्म ने अप्रैल 2025 में पंजीयन कराया था। शुरू में कपड़े और बाद में स्क्रैप के कारोबार का विवरण दर्ज किया गया। बताया गया कि फर्म का कारोबार लगभग चार करोड़ रुपये का है। लेकिन जांच में पाया गया कि फर्म ने जिन कंपनियों से खरीद दिखाई थी, वे पहले से ही निरस्त पंजीयन वाली कंपनियां थीं।
जाली दस्तावेज़ और काल्पनिक कारोबार
आगे की जांच में जब दस्तावेज़ खंगाले गए तो वे पूरी तरह जाली पाए गए। राज्य कर अधिकारी ने मौके पर निरीक्षण किया तो यह भी स्पष्ट हो गया कि जीएसटी कार्यालय में दर्ज पते पर फर्म अस्तित्व में ही नहीं है।
टैक्स चोरी और कार्रवाई
आरोपी ने कई फर्मों के साथ काल्पनिक व्यापार दिखाते हुए टैक्स चोरी की और सरकार को 77.77 लाख रुपये का नुकसान पहुँचाया। विभाग की रिपोर्ट के आधार पर फर्म का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। साथ ही, विभाग ने कोतवाली पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की तहरीर भी दी है।
कड़ा संदेश
अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी व्यापारी फर्जीवाड़ा कर सरकार को नुकसान पहुँचाने की कोशिश न करे।

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