जिले में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का काम तेज़ी से चल रहा है। इसी प्रक्रिया का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने नई चाल शुरू कर दी थी। SIR यानी विशेष पुनरीक्षण के नाम पर लोगों को कॉल और संदेश भेजे जा रहे थे। इन संदेशों में फर्जी ओटीपी भेजकर निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही थी, जिससे लोगों के खातों और मोबाइल डेटा तक पहुंच बनाई जा सके।
फर्जी कॉल और ओटीपी से लोगों को जाल में फंसाने की कोशिश
ठग खुद को आधिकारिक टीम का सदस्य बताकर लोगों से बातचीत कर रहे थे। वे मतदाता सूची में सुधार के बहाने ओटीपी मांगते और निजी विवरण लेने की कोशिश करते। कई लोगों को पहले इस धोखे का अंदाज़ा नहीं था, क्योंकि SIR का काम इसी समय जिले में चल रहा है। इस वजह से लोग इन कॉल और संदेशों को असली समझने लगे थे। मामला सामने आने पर प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ और लोगों को चेतावनी जारी की गई कि किसी भी स्थिति में ओटीपी या निजी जानकारी किसी अंजान व्यक्ति को न दें।
पुलिस ने चलाया जागरूकता अभियान
मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने गांव और कस्बों में जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। टीम लोगों को समझा रही है कि मतदाता सूची के काम के लिए केवल अधिकृत कर्मचारी ही घर–घर पहुंचते हैं। किसी भी कर्मचारी को ओटीपी, बैंक जानकारी या मोबाइल संबंधी गोपनीय जानकारी देने की जरूरत नहीं होती।
पुलिस का कहना है कि अगर कोई संदिग्ध कॉल या संदेश मिले, तो तुरंत इसकी सूचना नजदीकी थाने को दें। इससे ठगों को पकड़ने में मदद मिलेगी और दूसरे लोग भी सुरक्षित रहेंगे।
प्रशासन ने दी सख्त हिदायत
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और केवल आधिकारिक प्रतिनिधि ही इसे पूरा करते हैं। लोगों से अपील है कि बिना जांचे–परखे किसी भी कॉल का भरोसा न करें।
यह मामला जिले में साइबर सुरक्षा को लेकर बड़ा सबक बन गया है। अब उम्मीद है कि जागरूकता बढ़ने के साथ ऐसे मामलों पर जल्दी रोक लग सकेगी और लोग ऑनलाइन ठगी से बच पाएंगे।

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