महोबा में पराली जलाने पर सख्ती: खेत में उठे धुएँ का अब भारी पड़ेगा दंड

महोबा में खेतों में पराली या फसल अवशेष जलाने पर अब किसानों को भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। पर्यावरण को बचाने और मिट्टी की सेहत सुरक्षित रखने के लिए विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। तय नियमों के तहत अवशेष जलाने पर चरणबद्ध तरीके से आर्थिक दंड लगाया जाएगा, जो गंभीर मामलों में काफी अधिक हो सकता है।

कानून के तहत सख्त कार्रवाई का प्रावधान

पराली जलाना राष्ट्रीय हरित मानकों के खिलाफ माना गया है और इसे पूरी तरह गैरकानूनी घोषित किया गया है। खेत के आकार के अनुसार किसानों पर अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई होगी। जलाने की घटना दोहराई गई तो संबंधित व्यक्ति को आर्थिक दंड के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई और कारावास तक का प्रावधान है। विभाग का कहना है कि इस कदम का मकसद किसानों को दंडित करना नहीं, बल्कि पर्यावरण और जमीन की गुणवत्ता को बचाना है।

मिट्टी और पर्यावरण को होता है बड़ा नुकसान

फसल अवशेष जलाने से खेत की उर्वरता घटती है, मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीव नष्ट हो जाते हैं और खेत की प्राकृतिक संरचना बिगड़ जाती है। साथ ही उठने वाला धुआँ हवा की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। इससे खेत में अगली फसल की उत्पादकता भी कम हो जाती है। यही कारण है कि पराली जलाने पर रोक को सख्ती से लागू किया जा रहा है।

अवशेष को जलाएं नहीं, मिट्टी में मिलाएं

किसानों को सलाह दी गई है कि अवशेषों को जलाने की बजाय मिट्टी में मिला दें। इससे न केवल खेत की जलधारण क्षमता बढ़ती है, बल्कि लाभदायक जीवों के पनपने का मौका भी मिलता है, जिससे उपज में सुधार होता है। अवशेषों का उपयोग नाडेप या वर्मी कंपोस्ट बनाने में भी किया जा सकता है, जिससे खेत में जैविक तत्वों की मात्रा और बढ़ेगी।

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