प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की नई किश्त मिलते ही ललितपुर में किसान खुशी से झूम उठे। जिले के किसानों के लिए यह दिन खास रहा, क्योंकि इस मौके पर केवीके परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल बोने के बेहतर तरीके और आधुनिक खेती के तरीके भी बताए।
फसलें बढ़ेंगी तो मुनाफा भी बढ़ेगा
कार्यक्रम में पहुंचे कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि अब एक ही फसल पर निर्भर रहने का समय नहीं है। अगर किसान गेहूं के साथ चना, मटर और सरसों जैसी फसलें भी बोएं, तो खेतों की मिट्टी को बेहतर पोषण मिलेगा और किसान की कमाई भी कई गुना बढ़ सकती है। वैज्ञानिकों ने बताया कि ये फसलें खेत में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखती हैं, साथ ही मौसम की अनिश्चितता में किसानों को सहारा देती हैं।
उन्होंने खेतों में समय से तैयारी, बीज की गुणवत्ता और रोग-नियंत्रण के छोटे मगर असरदार उपाय भी बताए, जिन्हें अपनाकर किसान अपनी उपज और आय दोनों बढ़ा सकते हैं।
किसानों को मिली योजना की अगली किस्त
इस धन का उपयोग किसान अपने खेतों के लिए बीज, खाद, दवा और खेती से जुड़े जरूरी साधन खरीदने में कर सकते हैं। कार्यक्रम में किसानों को यह भरोसा भी दिलाया गया कि सरकार की योजनाओं का लाभ आगे भी इसी तरह सीधे किसानों तक पहुंचता रहेगा, ताकि खेती के बोझ को कम किया जा सके।
अधिकारी और किसान संगठनों ने साझा किए विचार
इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ और किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। मंच से किसानों ने अपने अनुभव, चुनौतियां और खेती में अपनाए जा रहे नए प्रयोग भी साझा किए।
कार्यक्रम का संदेश साफ रहा – खेती को सुरक्षित, टिकाऊ और लाभदायक बनाने के लिए फसल विविधीकरण ही समय की मांग है। किसानों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाने का संकल्प लिया।

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