महोबा से खास तैयारी, रेलवे ने बढ़ाई रफ्तार पौष–मार्गशीर्ष अमावस्या मेले में इस बार चित्रकूट पहुंचना और आसान होने जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए रेलवे ने महोबा मार्ग से दो विशेष ट्रेनों के संचालन का फैसला किया है। इसके साथ ही एक नियमित ट्रेन को भी अस्थायी रूप से आगे तक बढ़ाया जाएगा, ताकि मेले में आने-जाने वालों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
तीन दिनों तक चलेगी मेला स्पेशल सेवा
रेलवे प्रशासन ने तय किया है कि अमावस्या मेले की अवधि में लगातार तीन दिनों तक स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। ये ट्रेनें झांसी से चलकर महोबा के रास्ते चित्रकूट पहुंचेंगी और श्रद्धालुओं को सुगम व सुरक्षित यात्रा की सुविधा प्रदान करेंगी। यात्रियों की सुविधा के लिए इन ट्रेनों के समय भी निर्धारित कर दिए गए हैं ताकि मेले में जाने वाले भक्त बिना जल्दबाज़ी के अपनी यात्रा की योजना बना सकें।
पहली मेला स्पेशल ट्रेन दिन के समय संचालित होगी, जो महोबा के प्रमुख स्टेशनों से होते हुए चित्रकूट पहुंचेगी। वापसी भी शाम के समय ही निर्धारित की गई है, ताकि दर्शन के बाद यात्रियों को वापस लौटने में कोई दिक्कत न हो।
वहीं दूसरी स्पेशल ट्रेन रात के समय चलेगी, जिससे उन यात्रियों को राहत मिलेगी जो रात में यात्रा करना अधिक सुविधाजनक समझते हैं। यह ट्रेन भी महोबा होकर चित्रकूट पहुंचेगी और सुबह के समय वापसी सेवा देगी।
साधारण ट्रेन का भी बढ़ाया जाएगा विस्तार
भीड़ को देखते हुए महोबा एवं बांदा के बीच चलने वाली नियमित मेमो ट्रेन को भी आवश्यकतानुसार चित्रकूट तक बढ़ाया जाएगा। इससे मेले के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ने पर नियमित रेल सेवा भी सहयोगी साबित होगी।
यात्रियों को मिलेगी बेहतर सुविधा
रेलवे प्रशासन ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान भीड़, टिकट या समय की परेशानी से जूझना न पड़े। कई जिलों से आने वाले भक्तों को इससे बड़ी राहत मिलेगी, वहीं चित्रकूट मेले की रौनक भी और बढ़ेगी।
मेले के दौरान रेलवे स्टेशन और स्टाफ को भी अतिरिक्त व्यवस्था में लगाया जाएगा ताकि यात्रियों को हर स्तर पर सुगम व सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिले।
अमावस्या पर बढ़ेगी श्रद्धा, यात्रा बनेगी आसान
मेले के दिनों में चित्रकूट हमेशा से भीड़ से भरा रहता है और इस बार ट्रेन सेवाओं के विस्तार से श्रद्धालुओं के चेहरे पर और खुशी देखने को मिलेगी। रेलवे का यह फैसला न सिर्फ यात्रा को आरामदायक बनाएगा बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी नई दिशा देगा।

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