मेडिकल कॉलेज में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। यहां सीटी स्कैन मशीन लंबे समय से खराब पड़ी है। जांच के लिए पहुंचने वाले मरीजों को बिना जांच के ही लौटना पड़ रहा है। इससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और मरीजों में असंतोष बढ़ रहा है।
मशीन खराब, समाधान का इंतजार
सीटी स्कैन मशीन में तकनीकी खराबी आने के बाद से अब तक उसे दुरुस्त नहीं किया जा सका है। जांच में मशीन के एक अहम हिस्से में खराबी सामने आई, लेकिन मरम्मत की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। समय बीतने के साथ मरीजों की संख्या बढ़ती गई, जबकि सुविधा बहाल नहीं हो सकी।
गंभीर मरीजों पर ज्यादा असर
सीटी स्कैन न होने से कई तरह के मरीजों को परेशानी हो रही है। सिर में चोट, हड्डियों से जुड़ी दिक्कत, फेफड़ों की समस्या, सांस लेने में तकलीफ और पेट संबंधी शिकायतों वाले मरीज जांच के अभाव में उचित इलाज से वंचित हैं। डॉक्टरों के लिए भी बिना जांच के उपचार तय करना कठिन हो रहा है।
जांच के लिए भटकना मजबूरी
मरीज जब जांच के लिए अस्पताल पहुंचते हैं, तो मशीन खराब होने की जानकारी मिलते ही निराश लौट जाते हैं। कई मरीजों को बाहर निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है। वहां जांच कराने में ज्यादा खर्च आता है, जो हर किसी के लिए संभव नहीं होता। खासतौर पर कमजोर आर्थिक स्थिति वाले मरीजों के लिए यह बड़ी चुनौती बन गई है।
प्रशासनिक लापरवाही की चर्चा
मशीन लंबे समय से बंद होने के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। न तो अस्थायी समाधान नजर आ रहा है और न ही मरम्मत की समय-सीमा स्पष्ट है। इस स्थिति ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जल्द समाधान की उम्मीद
मरीज और उनके परिजन चाहते हैं कि सीटी स्कैन सुविधा जल्द से जल्द शुरू हो, ताकि उन्हें समय पर जांच और इलाज मिल सके। जब तक मशीन ठीक नहीं होती, तब तक अस्थायी इंतजाम किए जाने की मांग भी उठ रही है। फिलहाल मरीज उम्मीद लगाए बैठे हैं कि व्यवस्था में सुधार होगा और जांच के लिए उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा।

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