बीना की बेटियों ने एक बार फिर पूरे प्रदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। सांदीबनी मॉडल स्कूल की छात्राओं ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर स्कूल और शहर का नाम रोशन किया है। दोनों ही छात्राओं ने बिना किसी कोचिंग के केवल स्कूल और घर पर पढ़ाई कर यह उपलब्धि हासिल की है।
वैष्णवी रजक ने 10वीं में बनाया प्रदेश में सातवां स्थान
सांदीबनी मॉडल स्कूल की छात्रा वैष्णवी रजक ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 500 में से 493 अंक प्राप्त कर प्रदेश में सातवां स्थान हासिल किया है। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने न केवल स्कूल बल्कि पूरे नगर का गौरव बढ़ाया है। वैष्णवी के पिता किसान हैं और माता गृहिणी। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के केवल स्कूली शिक्षा के आधार पर यह सफलता पाई।
हिमांशी ठाकुर ने 12वीं में आठवां स्थान किया अपने नाम
स्कूल की ही एक अन्य छात्रा हिमांशी ठाकुर ने 12वीं की परीक्षा में 485 अंक प्राप्त कर प्रदेश में आठवां स्थान हासिल किया है। हिमांशी ने भी बिना किसी बाहरी कोचिंग के यह मुकाम हासिल किया है। दोनों छात्राओं की इस उपलब्धि पर पूरे शहर में खुशी का माहौल है।
स्कूल में हुआ भव्य स्वागत, प्राचार्य और पालिका अध्यक्ष ने दी बधाई
दोनों छात्राओं के स्कूल पहुंचने पर प्राचार्य मंजू यादव और स्टाफ ने ढोल-नगाड़ों के साथ फूल बरसाकर उनका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष लता सुकरवार भी स्कूल पहुंची और दोनों बेटियों को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
'मेहनत करने से कुछ भी हो जाता है, कुछ भी इम्पॉसिबल नहीं'
अपनी सफलता पर वैष्णवी ने कहा, "मैं इसका श्रेय अपने शिक्षकों, विद्यालय के सभी लोगों, अपने माता-पिता और परिवार को देना चाहूंगी।" अन्य बच्चों के लिए उनका संदेश था, "मेहनत करने से कुछ भी हो जाता है। कुछ भी इम्पॉसिबल नहीं है। ऐसा नहीं है कि संसाधनों की कमी से आप रुक जाएं। आज के समय में सब संसाधन उपलब्ध हैं और सरकारी स्कूल में भी अच्छी पढ़ाई होती है।"
हिमांशी ने भी अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों, माता-पिता और भगवान को दिया। उन्होंने बताया कि वह दिन भर या रात भर नहीं पढ़ती थीं, बल्कि एक-दो घंटे अच्छे से पढ़ती थीं ताकि विषय समझ में आए और याद भी रहे। उन्होंने कहा, "समझकर पढ़िए, घंटों रटने की जरूरत नहीं है।"
बिना कोचिंग के हासिल की सफलता
गौरतलब है कि दोनों ही छात्राओं ने किसी भी प्रकार की कोचिंग नहीं ली थी। उन्होंने पूरी तैयारी स्कूल में होने वाली पढ़ाई और घर पर स्वाध्याय के आधार पर की। वैष्णवी के पिता किसान हैं, जबकि हिमांशी के पिता रिफाइनरी में कार्यरत हैं और माता गृहिणी हैं। दोनों ने साबित किया कि संसाधनों के अभाव में भी मेहनत और लगन से मंजिल हासिल की जा सकती है।

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