झांसी में 'शादी का झांसा' देकर 35 लाख की ठगी: 610 अधेड़ बने शिकार, फर्जी मैरिज ब्यूरो का भंडाफोड़



झांसी, 24 अप्रैल 2026: झांसी के मसीहागंज की पॉश कॉलोनी सरयू विहार में मैरिज ब्यूरो की आड़ में ठगी का बड़ा धंधा चल रहा था। शातिर जालसाज जोड़ी अब तक 610 अधेड़ उम्र के लोगों को दूसरी शादी का झांसा देकर 35 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग चुकी है। पुलिस की छापेमारी से पहले ही दोनों मास्टरमाइंड फरार हो गए। इस गिरोह ने कई सरकारी कर्मचारियों और अफसरों को भी अपना शिकार बनाया है।


कैसे चल रहा था ठगी का पूरा खेल?


मंगलवार को एएसपी अरीबा नौमान की अगुवाई में टीम ने राजेंद्र प्रसाद गुप्ता के घर में चल रहे गिरोह का भंडाफोड़ किया। वहां से 17 युवतियां भी पकड़ी गईं थीं। मास्टरमाइंड सतीश एवं नीतू प्रजापति शगुन मैरिज ब्यूरो की आड़ में कॉल सेंटर चला रहे थे। देखरेख के लिए हिना को रखा गया था।


गिरोह में संचालिका हिना कौसर समेत अन्य युवतियां हैं। हिना ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले राज उगले। उसने बताया कि कई सरकारी कर्मचारी एवं अफसरों को भी शिकार बनाया गया था।


कॉल सेंटर से बरामद हुए 29 रजिस्टर


कॉल सेंटर के अंदर से 29 रजिस्टर बरामद हुए। हरेक युवती को अपना रिकॉर्ड इनमें रखना होता था। इनमें तीन रजिस्टर में ठगी की रकम दर्ज थी। इनमें कुल 610 लोगों के नाम थे। पुलिस अफसरों के मुताबिक झांसी, ललितपुर, कानपुर, हमीरपुर समेत दूसरे राज्यों के लोगों के नाम एवं मोबाइल नंबर दर्ज हैं। करीब 30-35 लाख रुपये का विवरण रजिस्टर में मिला।


युवतियों के लिए रखे तीस मोबाइल समेत चार कंप्यूटर सिस्टम भी बरामद हुए। कंप्यूटर में युवतियों की तस्वीरों वाले एल्बम भी मिले, इनमें एआई से बनी तस्वीरें भी थीं। लोगों को ठगने में इनका इस्तेमाल होता था।


मैट्रिमोनियल साइट से चुराते थे डेटा


सतीश एवं नीतू प्रजापति बेहद शातिर जालसाज हैं। दोनों ही कंप्यूटर के जानकार हैं। उनके पास 30 हजार से अधिक लोगों का डेटा मिला है। अधिकांश की उम्र 45-55 साल है। किसी न किसी वजह से ये लोग दूसरी शादी करना चाहते हैं।


मैनेजर हिना कौसर ने पुलिस को बताया कि मैट्रिमोनियल साइट, वैवाहिक विज्ञापनों से यह डेटा चुराया जाता था। सतीश एवं नीतू इसे जमा करते थे। रजिस्टर में तमाम सरकारी कर्मचारी एवं अफसरों के नाम भी दर्ज मिले हैं।


जीएसटी में था मैरिज ब्यूरो का पंजीकरण


शगुन मैरिज ब्यूरो के नाम से जालसाजों ने इसका जीएसटी पंजीकरण भी करा रखा था। साथ ही श्रम एवं उद्योग विभाग में भी पंजीकरण था। ये सभी पंजीकरण हिना कौसर के नाम से कराए गए थे।


ट्रेड प्रॉमोट भी जालसाजों ने हिना कौसर के नाम से कराया था। यह काम बाकायदा कागजों में चल रहा था। यूपीआई के माध्यम से रकम वसूली जाती थी। इसके लिए दो यूपीआई खाते भी खोले गए थे। इन्हीं खातों के जरिये लेनदेन किया जाता था।


499 से 30 हजार तक की वसूली, एआई फोटो का इस्तेमाल


कॉल सेंटर के लिए युवतियां रखी गई थीं। सतीश एवं नीतू दूसरी शादी के इच्छुक लोगों को तलाशते थे। इसके बाद युवतियां उनको फोन करती थीं। उनसे न्यूनतम 499 रुपये से लेकर 30 हजार रुपये तक वसूले जाते थे। पैसा वसूलने के बाद उनके नंबर ब्लॉक कर दिए जाते थे। कुछ सरकारी कर्मचारियों ने मोबाइल नंबरों के आधार पर इनका ठिकाना तलाश लिया था। उनके बाद वहां लोग सीपी बाजार थाने पहुंचे। सर्विलांस टीम की मदद से पुलिस गिरोह तक पहुंच सकी।


मास्टरमाइंड फरार, पुलिस कर रही तलाश


इस मामले के दोनों मास्टरमाइंड की तलाश की जा रही है। उनकी गिरफ्तारी के बाद इस मामले में नई बातें भी सामने आएंगी। अभी तक की जांच में मानव तस्करी जैसी कोई बात सामने नहीं आई है। हालांकि, इस बिंदु की भी जांच कराई जा रही है।


अरीबा नौमान, एएसपी: "पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। जालसाजों ने पांच हजार रुपये महीने वेतन पर युवतियों को नौकरी पर रखा था। उनका काम शादी के इच्छुक लोगों से सिर्फ बात करना था। यहां से बरामद 29 रजिस्टर के सहारे जांच आगे बढ़ रही है।"

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