यूपी के एक्सप्रेस-वे पर दौड़ेगा विकास: 18 औद्योगिक क्लस्टर से बदलेगा प्रदेश का नक्शा, बुंदेलखंड-पूर्वांचल को बड़ा बूस्ट


 


उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए योगी सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना तेज कर दी है। प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर के किनारे 18 इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) विकसित किए जाएंगे। इस योजना का फोकस विशेष रूप से बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे विकास के पिछड़े क्षेत्रों पर है, जिससे यहां औद्योगिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने इसके लिए प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।


बुंदेलखंड और पूर्वांचल को विकास का नया इंजन


सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, जो लंबे समय से औद्योगिक दृष्टि से उपेक्षित रहे हैं। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आधुनिक लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग हब तैयार किए जाएंगे। इससे न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि युवाओं को पलायन के बिना ही रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।


योजना के तहत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में फैले पांच प्रमुख एक्सप्रेस-वे – गंगा एक्सप्रेस-वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे – के किनारे ये क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इन क्लस्टरों के माध्यम से उत्पादन, भंडारण और सप्लाई चेन को एकीकृत करने की योजना है, जिससे औद्योगिक उत्पादन और लॉजिस्टिक्स दोनों को गति मिलेगी।


बांदा और गाजीपुर होंगे सबसे बड़े औद्योगिक केंद्र


इस योजना के तहत बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर स्थित बांदा में सबसे बड़ा क्लस्टर विकसित किया जाएगा, जो 1426 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा। वहीं, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर गाजीपुर में 1026 एकड़ भूमि पर दूसरा सबसे बड़ा क्लस्टर तैयार किया जाएगा। इन दोनों केंद्रों को बड़े लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने की योजना है। गौरतलब है कि यूपीडा द्वारा निर्धारित 18 क्लस्टर के अलावा, राज्य सरकार की कुल मिलाकर 27 इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) स्थापित करने की योजना है, जो 26 जिलों में 12,700 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले होंगे। इससे प्रदेश के व्यापक औद्योगिक परिदृश्य में और अधिक विस्तार की संभावना है।


एक्सप्रेस-वे के अनुसार क्लस्टरों का वितरण


प्रमुख एक्सप्रेस-वे के किनारे क्लस्टरों का वितरण इस प्रकार है:


गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे सबसे अधिक 6 क्लस्टर बनाए जाएंगे, जो मेरठ, उन्नाव, बदायूं, संभल, हरदोई और शाहजहांपुर में स्थित होंगे। इनमें से उन्नाव में ओम लॉजिस्टिक्स द्वारा 150 करोड़ रुपये के निवेश से एक लॉजिस्टिक्स हब भी स्थापित किया जा रहा है।


बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर बांदा, औरैया, महोबा और हमीरपुर में 4 क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।


पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर सुलतानपुर, अंबेडकरनगर, गाजीपुर और अमेठी में 4 क्लस्टर बनेंगे।


आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर फिरोजाबाद और इटावा में 2 क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।


यूपीडा ने शुरू की प्लॉट आवंटन प्रक्रिया


इन सभी परियोजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने प्लॉट आवंटन के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार का लक्ष्य निजी निवेशकों को आकर्षित करके इन क्लस्टरों को तेजी से विकसित करना है, जिससे उत्पादन, भंडारण और सप्लाई चेन को एकीकृत किया जा सके।


यूपीडा के इस कदम से औद्योगिक समूहों और निवेशकों में काफी उत्साह है। एक्सप्रेस-वे के किनारे बनने वाले ये क्लस्टर न केवल विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देंगे, बल्कि राज्य को एक बड़े लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भी स्थापित करेंगे। इससे उत्तर प्रदेश देश के औद्योगिक मानचित्र पर एक नई पहचान बनाएगा और यहाँ के लोगों को विकास का लाभ सीधे तौर पर मिलेगा।


बुंदेलखंड में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण


बुंदेलखंड क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (BIDA) के तहत झांसी जिले के 33 गांवों में 56,662 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिसका मास्टर प्लान 2045 तैयार किया गया है। इसमें 35.8 प्रतिशत भूमि औद्योगिक, 15.2 प्रतिशत आवासीय और 10.6 प्रतिशत हरित क्षेत्र के लिए निर्धारित की गई है। इसके अलावा, झांसी में अब तक 18,000 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। यह बड़े पैमाने पर भूमि संचय क्षेत्र के दीर्घकालिक औद्योगिक विकास की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


यह योजना न केवल उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नक्शे को बदलने की क्षमता रखती है, बल्कि बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे क्षेत्रों के लिए विकास का एक नया अध्याय भी लिखेगी।

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