जीवन में उत्सव तथा उल्लास एक-दूसरे के पर्याय होते हैं। प्राचीन काल से वर्तमान तक कई संस्कृतियों के साक्षी प्रागैतिहासिक स्थल जामगढ़-भगदेई में सोमवार को पारंपरिक मढ़ई मेला इस बात की तस्दीक करता दिखाई दिया। ढोलक, मृदंग और टिमकी जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के साथ ढालों की मनमोहक थिरकन का बडी संख्या मे लोग आनंद उठाते रहे।
बता दें कि इस मेले में आसपास के करीब दो दर्जन गांवों के लोग शामिल हुए। स्थानीय उत्पादों की जमकर बिक्री से व्यापारी भी खुश दिखाई दिए। भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह अंचल पुराने मालवा, बुंदेलखंड और गोंडवाना के मध्य बसा हुआ है। शायद यही कारण है कि यहाँ के लोक मानस पर इन तीनों संस्कृतियों का असर भरपूर दिखाई देता है। मढ़ई बुंदेलखंड में पशुपालकों का उत्सव है, तो गोंडवाना में इसे यहाँ का मूल समुदाय अपने सामुदायिक देवी-देवताओं को जाग्रत करने का अवसर मानता है। मढ़ई मेले में इन दोनों संस्कृतियों की झलक दिखाई दे रही थी। इस तरह यह मेला अलग-अलग संस्कृतियों के समन्वय का अहसास करा रहा था।
क्या है ढाल?
इस मढ़ई मेले में भगदेई, सेनकुआ, रमपुरा, बाजनी, रमगढा, डूंडादेह, डगडगा, पंझिरपा, डुंगरिया, रतनपुर, पाली, पंझिरपा सहित कई गांवों के लोग शामिल हुए। मोटे तौर पर ढाल को उन शक्तियों की प्रतीक माना जा सकता है, जो प्राचीन समुदायों, वनों, वनस्पतियों और पशुओं की रक्षा करती हैं। चर्चा के आधार पर इन्हे प्राकृतिक देवी-देवता की श्रेणी में रखा जा सकता है।
कैसे बनाते हैं ढाल?
डुंगरिया के गोविंदा बताते हैं कि ढाल उन्हीं परिवारों में बनती है, जिनमें यह पहले से बनती रही है। पंझिरपा के परमेश्वर के अनुसार किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए भी ढाल माता बनाई जाती है। इसे बनाने की विधि के बारे में बताया गया कि पहले बांस के पेड की पूजा करके लंबा बांस लाया जाता है। इसके बाद इसे मोरपंख से सजाकर ढाल का रूप दिया जाता है।
जमकर हुआ कारोबार
मढई मेले में स्थानीय उत्पादों का जमकर कारोबार हुआ। सिंघाडे, सीताफल, स्थानीय कंदमूल और फलों सहित मिट्टी के बर्तन और खिलौनों की जमकर बिक्री हुई। बच्चे मिट्टी और रंब बिरंगे कागज के बने खिलौनों की दुकानों पर भीड़ रही।
दिखा कोरोना का असर
मढई मेले में आए रामसेवक घोड़ावाले बताते हैं कि इस बार मढ़ई मेले पर कोरोना का असर साफतौर पर देखा जा सकता है। बीते सालों में ढालों की संख्या सैकडा के आसपास रहती थी। इस बार दो दर्जन के आसपास सिमटकर रह गई है।
मेले में हुआ 127 पंडाओं का सम्मान
नगर का वार्षिक पारंपरिक मढ़ई मेला मवेशी बाजार में आयोजित हुआ। यहाँ चंडी माता की चौकी को सजाकर विशेष पूजन अर्चना की गई। नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले पंडा एवं ढाले नचाने वालो को हिंदू उत्सव समिति के तत्वाधान में पूर्व विधायक रामकिशन पटेल के द्वारा अंग वस्त्र एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। इस दौरान 42 गांव से आए 127 पंडाओं का हिउस अध्यक्ष दुर्गा प्रसाद धाकड़, कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश बबेले, पवन रघुवंशी, ग्रामीण मंडल अध्यक्ष रेवा सिंह गोदर, राहुल पटेल, संतोष मालवीय, हिमकर उपाध्याय, पवन सिलावट, चंद्रभान खूते, अनिल धाकड़, ओम प्रकाश चतुर्वेदी, पवन अग्रवाल, गोपाल स्वरूप ठाकुर ने सम्मानित किया।

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