138 साल में पहली बार बुंदेलखंड के वृंदावन का आंगन इस दीवली रहेगा सूना

 

बुंदेलखंड की अपने रीति रिवाजों और अनोखी परंपराओं के समूचे भारत में अलग ही पहचान है। फिर चाहे महोबा का गोरखगिरि हो या आल्हा-ऊदल की वीरता दर्शाती विशाल चंदेलकालीन इमारतें। इन्हीं में एक है चरखारी कस्बा के विशाल तालाब के पास स्थित गोवर्धन नाथ जू मंदिर। मंदिर परिसर में कार्तिक मास में एक माह तक विशाल मेला लगता है, लेकिन कोरोना के कारण इस बार यह मेला नहीं लगा। शायद 138 साल में पहला मौका होगा, जब बुंदेलखंड के वृंदावन का आंगन इस दिवाली सूना रहेगा।  

कृष्ण मंदिरों से विभूषित महोबा जिले की चरखारी नगरी कार्तिक में पूरे माह के लिए वृंदावन में तब्दील हो जाती है। यह नगर सहस्त्र श्री गोवर्धन नाथ के प्रति भगवान कृष्ण के अन्य स्वरूपों का समर्पण है। इलाके के 108 ऐतिहासिक देव मंदिरों की प्रतिमाएं देवालय छोड़ मेला परिसर में डेरा डाल देती हैं, जिससे पूरा कस्बा कृष्णमय हो जाता है। ऊंची पर्वत श्रंखलाओं और कश्मीर की वादियों को मात देते कमल दलों से आच्छादित सरोवरों के बीच बसे चरखारी को बुंदेलखंड का कश्मीर कहा जाता है।

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