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नेत्र विज्ञान शोधकर्ता को मिला सदगुरू ह्युमानिटेरियान अवार्ड

विश्व के प्रसिद्ध नेत्र विज्ञान के शोधकर्ता एवं प्रतिष्ठित प्रो. जीवीएस मूर्ति (निदेशक एसएसीडीआईआर) इंडियन...

Bundelkhand News


चित्रकूट। विश्व के प्रसिद्ध (Bundelkhand) नेत्र विज्ञान के शोधकर्ता एवं प्रतिष्ठित प्रो. जीवीएस मूर्ति (निदेशक एसएसीडीआईआर) इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ हैदराबाद एवं प्रो. लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रापिकल मेडिसिन अपने चित्रकूट के दो दिवसीय दौरे के दौरान संत रणछोड़ दास महाराज द्वारा स्थापित श्री सदगुरू सेवा संघ ट्रस्ट जानकी कुण्ड चित्रकूट का भ्रमण कर ट्रस्ट द्वारा संचालित विभिन्न प्रकल्पों का अवलोकन कर ट्रस्ट की सराहना की।

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श्री सदगुरू सेवा संघ ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं डायरेक्टर डॉ. बी के जैन ने भ्रमण के दौरान उनका स्वागत किया। वहीं मानव सेवा के लिए समर्पित प्रो. जी वी एस मूर्ति ने नेत्र विज्ञान के क्षेत्र में शोध करके जो काम किया, उससे प्रभावित होकर ट्रस्ट ने उन्हें मानव सेवा अवार्ड कार्यक्रम आयोजित किया। प्रो. जी वी एस मूर्ति ने कहा कि वह अपनी पहली सेवा ग्राम मेडिकल कॉलिज में दी है। उन्होंने बताया कि सेवा ग्राम में ही महात्मा गांधी का आश्रम है और हर छात्र 15 दिन उसी आश्रम में पहले व्यतीत करता है, उसके बाद श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट में काम किए। यह दोनो ही इंस्टीट्यूशन हमे याद दिलाते है की यह ही भारत है। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता के लिए हृदय से भावना होनी चाहिए। जब यह भावना होती है तभी आप आगे बढ़ सकते हैं। चित्रकूट के माडल को सारे देश यूज करते हैं। रिसर्च के लिए एक साथ मिलकर काम करना चाहिए।

वहीं ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं डायरेक्टर डॉ. बी के जैन ने कहा कि 1995 में दिल्ली के निर्माण भवन में उनकी और प्रो जी वी एस मूर्ति की पहली मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा कि हमारी कम्यूनिटी को प्रो. मूर्ति ने ही बढ़ाया है। आगे बढ़ने के लिए सबको सोच बदलनी पड़ेगी, सोच बदली तो देश बदला। अगर आप भी सोच बदलेगे तो आप भी आगे बढ़ेंगे। इस अवसर पर श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट और सदगुरू परिवार के तरफ से डॉ. बी के जैन ने उन्हें स्मृति चिन्ह और मानवता के लिए अंधत्व निवारण मिशन एवं वैश्विक नेत्र विज्ञान पर अमूल्य योगदान के लिए सदगुरू ह्युमानिटेरियान अवार्ड से सम्मानित किया। 

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