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लोगों के सहयोग से 1990 में अयोध्या में उमड़ा था कारसेवकों का सैलाब

लोगों के सहयोग से 1990 में अयोध्या में उमड़ा था कारसेवकों का सैलाब

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कार सेवक अयोध्या की पावन भूमि में 10 दिन रहे और रात में पुलिस से बचते हुए 20 किलोमीटर खेतों की पगडंडी में पैदल चलकर अयोध्या के सेवकपुरम पहुंचे। पुलिस की बर्बरता आखों से देखी थी। वह कार्य जब पूरा होने की ओर है। तब 33 वर्ष पुरानी यादें बरबस ताजा हो जाती हैं और रोम-रोम सिहर उठता है।

कारसेवक बिदोखर निवासी मिथलेश कुमार द्विवेदी बताते हैं कि अयोध्या क्षेत्र की जनता के सहयोग से ही इतनी बड़ी संख्या में कारसेवक अयोध्या तक पहुंचने में कामयाब हो पाए थे। उनमें से एक मीरपुर गांव के अर्जुन सिंह भी थे। जिन्होंने तन-मन-धन से कारसेवकों की आवभगत की थीं। सबसे अधिक कारसेवकों अपने गांव में ठहराया और लगातार 10 दिन तक भंडारा आयोजित किया

घरों में ठहराया और रात में कार सेवकों के साथ अयोध्या तक पहुंचाने में पूरी मदद की और जरा भी हतोत्साहित नही होने दिया। अपने गांव से 100 से अधिक कारसेवकों को हम लोगों के साथ अयोध्या भेजा था। उस समय लखनऊ से अयोध्या जाने वाले कारसेवकों को सोहावल स्टेशन में उतरने के निर्देश थे। वहां पर विहिप के कार्यकर्ता और चार साधू स्टेशन के बाहर लगे थे।

वह धीरे से कारसेवक का परिचय जानकर उन्हें आगे जाने का संकेत देते थे।

इस काम में मीरपुर गांव के निवासी अर्जुन सिंह ने महती भूमिका निभाई थी। उन्होंने अपने गांव के लोगो को तैयार करके सर्वाधिक कारसेवकों 10 दिन तक ठहराया था। किसी कार सेवक को पुलिस की गिरफ्त में नही आने दिया था और सकुशल अयोध्या भेजा था।

इसी तरह से अयोध्या क्षेत्र के गांव गांव में ऐसे कट्टर राम भक्त सक्रिय थे। इनके सहयोग से अयोध्या में कारसेवकों का भारी हुजूम पुलिस की सख्ती के बाद भी पहुंच गया था।

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