रक्षाबंधन पर यहां बहनें नहीं बांधतीं भाई को राखी, 800 साल पुरानी अनोखी परंपरा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

छतरपुर. रक्षाबंधन के पर्व में अब कुछ ही घंटे शेष हैं. इस साल भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक त्योहार 9 अगस्त को मनाया जाएगा. बहनें इस पर्व पर भाई की कलाई पर राखी बांधकर रक्षा का वचन लेती हैं लेकिन बुंदेलखंड के महोबा और छतरपुर जिले में रक्षाबंधन का पर्व तय दिन नहीं मनाया जाता है. इसके पीछे वजह यह है कि यहां एक ऐतिहासिक परंपरा के चलते यह त्योहार एक दिन बाद मनाया जाता है. साथ ही इस दिन महोबा में ऐतिहासिक मेले का भी आयोजन होता है. इस धरती के वीरों को याद करने के लिए भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाती है.

उत्तर प्रदेश के महोबा और मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के अधिकांश इलाकों में सदियों से रक्षबंधन का त्योहार एक दिन बाद मनाने की परंपरा है. इसके पीछे भाई-बहन के प्रेम और एक ऐतिहासिक युद्ध की कहानी है, कि महोबा का अपना गौरवशाली इतिहास है. यहां रक्षाबंधन एक दिन बाद मनाने की परंपरा 1182 ई. के चंदेल शासनकाल से चली आ रही है. साथ ही छतरपुर जिले के आधे हिस्से में भी रक्षाबंधन का त्योहार एक दिन बाद मनाने की परंपरा है. दरअसल उस समय दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान ने महोबा पर हमला कर दिया था. उस समय महोबा में चंदेल शासक परमाल का राज था. कहा जाता है कि पूर्णिमा के दिन यहां राजा पृथ्वीराज चौहान और महोबा के शूरवीर आल्हा-ऊदल के बीच घनघोर युद्ध चल रहा था, जिस वजह से विजय के बाद दूसरे दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया गया. तभी से यह परंपरा यहां चली आ रही है.

राजा परमाल ने ठुकराईं पांचों शर्त

महोबा में 832 ईसा पूर्व में दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान ने अपने 7 लाख सैनिकों के साथ महोबा के राजा परमाल पर आक्रमण कर पांच शर्तें रख युद्ध न करने की बात कही थी लेकिन राजा परमाल ने पांचों शर्तों को ठुकरा दिया था. जिसके बाद पृथ्वीराज चौहान ने महोबा पर आक्रमण कर दिया था. राज परमाल के वीर योद्धा आल्हा-उदल ने पूर्णिमा के दिन पृथ्वीराज चौहान को धूल चटा यहां से भगा दिया था. पूरे दिन लड़ाई चलने के कारण पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाया जा सका था, इसलिए एक दिन बाद इस पर्व को मनाया गया था. तभी से महोबा में रक्षाबंधन का पर्व इसी परंपरा से मनाया जाता है.

साभार : न्यूज़ 18


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