दमोह जिले में एक तरफ तो इस साल अब तक झमाझम बारिश हुई है, जबकि अभी भी बारिश का दौर जारी है. लेकिन औसत से ज्यादा पानी गिरने के बाद भी जिले के कई गांवों में लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है. क्योंकि गांव में पानी भर जाने की वजह से लोगों को साफ पानी नहीं मिल पा रहा है, जबकि पीने का पानी लाने के लिए ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. आलम यह है कि पानी के अंदर ही पानी की तलाश हो रही है, क्योंकि गांव में जलभराव की स्थिति होने से हेंडपंप और कुएं डूब गए हैं, ऐसे में अब पानी लाया जाए तो कहा से|
दमोह जिले के जबेरा ब्लॉक में आने वाले रमपुरा गांव में पीने के पानी के लिए केवल एक हेडपंप लगा है, लेकिन जहां यह हेडपंप लगा है वहां जगह बरसात के दिनों में तालाब में बदल जाती है, ऊपर से अगर ज्यादा बारिश हो जाए तो परेशानियां और बढ़ जाती हैं. लेकिन गांव में साफ पानी के लिए कोई दूसरा साधन नहीं है, ऐसे में महिलाएं और बच्चे इसी हेडपंप से पानी भरने मजबूर हैं और रोजाना यहां आकर पानी भरते हैं, जबकि परेशानी यह भी है कि यह पानी भी दूषित हो सकता है, क्योंकि आधे से ज्यादा हेडपंप पानी में डूबा है. ऐसे में इस गांव के लोगों की परेशानी को समझा जा सकता है जो पानी में भी पानी तलाशते नजर आ रहे हैं.
सिस्टम संकट
गांव के लोग कई दफा पीएचई विभाग के साथ और दूसरे अफसरों को इसकी शिकायत कर चुके हैं,, लेकिन किसी का ध्यान इस समस्या की तरफ नहीं जा रहा है. मजबूरी में लोग जोखिम उठाकर पानी भरने के लिए मजबूर है. क्योंकि बरसात के पानी में वह अंदर जाते हैं तो कई दिक्कतें भी हो सकती हैं. गांव वालों की मानें तो सालों से यही स्थिति है, हर साल बरसात में यही दुर्दशा दोहराई जाती है, जहां लोगों को पानी भरने के लिए परेशान होना पड़ता है, ऐसे में तो इसे जल संकट नहीं बल्कि सिस्टम संकट ही कहा जाएगा.
एक तरफ सरकार हर गांव को नलजल योजना से जोड़ने की बात करती है, तो दूसरी तरफ रमपुरा जैसे गांव में लोग इस तरह से परेशान हो रहे हैं, ऐसे में तो इसे जल संकट नहीं बल्कि सिस्टम संकट ही कहा जाएगा.
साभार : ज़ी न्यूज़

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