कालपी। धौलपुर बांध से छोड़ गए पानी से यमुना व सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने का सिलसिला अभी खत्म नहीं हुआ है। सोमवार की शाम यमुना का जलस्तर खतरे के निशान 108मीटर को पार कर 108.39 मीटर पर पहुंच गया है। जलस्तर प्रति घंटे पांच से छह सेंटीमीटर बढ़ रहा है। इससे तहसील मुख्यालय आने वाले लगभग 12 गांवों का संपर्क टूट गया है।
लोगों कहना है कि अभी वह पुरानी हालातों से उबर नहीं पाए थे कि दोबारा से बाढ़ के हालात से नींद गायब है। अगर यही बना रहा तो फिर से घरों से बाहर निकलना पड़ेगा। रविवार की शाम से यमुना का जलस्तर बढ़ाना शुरू हो गया था, सोमवार की शाम चार बजे तक खतरे के निशान 108 मीटर से 39 सेंटीमीटर अधिक हो गया है। जल स्तर बढ़ने से यमुना के तटीय इलाकों में ग्रामीणों को भय व्याप्त हो गया है।
पिछले महीने 28 जुलाई को यमुना का जलस्तर में निरंतर बढ़ना चालू हुआ तो जो खतरे के निशान से पांच मीटर ऊपर अधिक हो गया था। कई ग्रामों में यमुना का पानी घरों में पहुंच गया था और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा था। किसानों की फसलें भी यमुना में डूब कर पूरी तरीके से बर्बाद हो गई थी। यमुना का जलस्तर फिर बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में खलबली मच गई है।
वर्तमान में यमुना का जलस्तर 108.39 पर पहुंच गया है। इससे रायड,दिवारा, के ऊपर पानी आ जाने से वहां के लोगों का मुख्यालय सीधे संपर्क टूट गया है। साथ ही कीरतपुर, देवकली, मैनूपुर, गुढ़ा खास, नया पुरवा, शेखपुर गुढ़ा,धर्मपुर आदि का संपर्क टूट गया है। इन सभी ग्रामों को तहसील मुख्यालय आने के लिए 15 से 20 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इसी तरह यमुना का जलस्तर बढ़ता रहा तो रात तक यमुना के बाढ़ का पानी ग्रामों में प्रवेश कर सकता है।
क्षेत्रीय विधायक विनोद चतुर्वेदी ने मौके पर पहुंचकर यमुना के बढ़ते हुए जलस्तर की हकीकत को जाना। उन्होंने तहसील प्रशासन को निर्देश दिए कि यमुना के बढ़ते हुए जल स्तर से ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की समस्या ना हो।
जान जोखिम में डालकर कर रहे हैं रपटा पार
यमुना का जलस्तर बढ़ने से कई ग्रामों के रपटों के ऊपर पानी चलने लगा है। स्थानीय प्रशासन के द्वारा अभी तक वहां पर किसी तरह की पिकेट ड्यूटी नहीं लगाई गई है और न ही इन रपटों पर बेरिकेडिंग की गई है। इससे ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर बाइक व पैदल पानी में घुसकर रपटा, पार कर रहे हैं। इससे कभी भी कोई जनहानि हो सकती है। लेकिन प्रशासन का इस तरफ ध्यान नहीं है। प्रमुख रूप से रायड दिवारा,रपटा, जौंधर नाला रपटा पिपरौंधा रपटा, के ऊपर पानी आ गया है।
साभार : अमर उजाला

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