चित्रकूट। शारदीय नवरात्र का पावन पर्व सोमवार से शुरू हो गया। तड़के से ही जिलेभर के देवी मंदिरों और पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री (स्थानीय रूप से मां गौरी) के दर्शन कर विधिवत पूजन-अर्चन किया। महिलाओं सहित हर आयु वर्ग के श्रद्धालु मंदिरों और पंडालों में पहुंचकर माता के जयकारे लगाते रहे।
शहर के कालीदेवी मंदिर के अलावा मऊ, राजापुर, मानिकपुर, पहाड़ी, भरतकूप और शिवरामपुर के मंदिरों में अलसुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। घंटों की गूंज और मंत्रोच्चारण से वातावरण भक्ति भाव से सराबोर हो गया। राजापुर स्थित जलापा मंदिर में विशेष भीड़ उमड़ी। वहीं, लालापुर स्थित महार्षि वाल्मीकि आश्रम में नौ दिवसीय मेले का शुभारंभ हुआ। यहां माता अशावर देवी के दर्शन के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे। मान्यता है कि इस मूर्ति को माता सीता का स्वरूप माना जाता है और इनके दर्शन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
इस वर्ष जिले में कुल 1125 स्थानों पर नवरात्र पंडाल सजाए गए हैं। समितियों ने आकर्षक रोशनी और झांकियों से पंडालों को भव्य रूप दिया है। कहीं विद्युत झांकियों के माध्यम से मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूप और रावण-दहन की झलक प्रस्तुत की जा रही है, तो कहीं पुष्पों और रंग-बिरंगी सजावट से बने पंडाल भक्तों को आकर्षित कर रहे हैं।
नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने घर-घर में कलश स्थापना की और अखंड ज्योति प्रज्वलित कर व्रत का संकल्प लिया। ग्रामीण अंचलों में भी महिलाओं ने प्रातःकाल स्नान-ध्यान कर माता की आराधना की।
हालांकि, कुछ प्रमुख मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर दिखी। कालीदेवी मंदिर में पुलिस बल की अनुपस्थिति के कारण श्रद्धालुओं को भीड़ में धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ और पूरे जिले में नवरात्र का शुभारंभ आस्था, उल्लास और उत्साह के साथ हुआ।

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