Chitrakoot: विदेशी कलाकारों ने मंचित किया सीता हरण और हनुमान मिलन

राघव प्रयागघाट पर चल रहे अंतरराष्ट्रीय रामलीला महोत्सव में इंडोनेशिया और वियतनाम से आए कलाकारों ने मंच पर अपनी अदाकारी और भावपूर्ण अभिनय से दर्शकों को मोहित कर दिया।

मारीच राक्षस का सुनहरे हिरण का रूप धारण कर पंचवटी की ओर जाना, माता सीता का उस पर मोहित होना, भगवान राम का उसका पीछा करना और फिर लक्ष्मण रेखा के बाद रावण द्वारा सीता का हरण किया जाना – इन दृश्यों को इतनी सजीवता से प्रस्तुत किया गया कि वातावरण गमगीन और रोमांचक दोनों हो गया। जब रावण अपनी लीला निभाते हुए मंच पर आया, तो दर्शक विस्मित होकर तालियों से गूंज उठे। वहीं हनुमान मिलन का दृश्य आते ही पूरा परिसर श्रद्धा और उत्साह से भर गया।

कलाकारों ने न केवल अभिनय बल्कि पारंपरिक वेशभूषा, मुखौटे और नाटकीय भाव-भंगिमाओं से कथा को जीवंत कर दिया। मंचन के दौरान दर्शक जयकारों से गूंजते रहे और कई लोग भावविभोर होकर प्रभु श्रीराम की भक्ति में डूबते दिखाई दिए।

रामलीला का आकर्षण केवल राघव प्रयागघाट तक ही सीमित नहीं रहा। शहर के नई बाजार, पुरानी बाजार, भौरी, मऊ और राजापुर सहित कई क्षेत्रों में भी रामलीला का आयोजन हुआ। यहां भी दूर-दराज़ के ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे और पूरी श्रद्धा से लीलाओं का रसपान किया।

इसी क्रम में तहसील क्षेत्र के ऐचवारा गांव में गार्गेय रामलीला समिति द्वारा धनुष यज्ञ का भव्य मंचन हुआ। जैसे ही भगवान राम ने शिव धनुष को भंग किया, पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। सबसे भावुक दृश्य तब रहा जब नन्हे-मुन्ने बच्चों ने प्रभु राम और माता सीता की भूमिका निभाई। उनकी मासूम अदाओं और गंभीर अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय रामलीला में विदेशी कलाकारों की भागीदारी ने यह साबित किया कि रामकथा केवल भारत की धरोहर नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है। रामायण की यह गाथा सीमाओं से परे जाकर दुनिया को भक्ति, सत्य और मर्यादा का संदेश देती है।

चित्रकूट की धरती पर प्रस्तुत यह अद्भुत मंचन न केवल आस्था का पर्व बना, बल्कि एक सांस्कृतिक संगम भी साबित हुआ, जहां भक्त और कलाकार एक सूत्र में बंधकर भगवान श्रीराम की महिमा का गुणगान करते दिखे।

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