उरई। दिवाली जैसे बड़े त्योहार में अब महज 25 दिन बचे हैं, लेकिन जालौन जिले की लगभग 50 फीसदी सड़कें अभी भी गड्ढों में तब्दील हैं। खराब सड़कों से लोगों का आवागमन मुश्किल हो रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्कूली बच्चों से लेकर आम नागरिक तक परेशान हैं। हल्की बारिश में सड़कों के गड्ढे पानी से भर जाते हैं, जिससे हालात और बिगड़ जाते हैं।
दरअसल, मुख्यमंत्री ने त्योहार से पहले सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए थे। लोगों को उम्मीद थी कि लंबे इंतजार के बाद राहत मिलेगी, लेकिन हकीकत इससे उलट है। काम की गति इतनी धीमी है कि लोगों का कहना है—अगर यही हाल रहा तो त्योहार क्या, शायद एक साल बाद भी सड़कें सुधरेंगी नहीं।
डेढ़ साल में ही दोबारा गड्ढों में तब्दील सड़क
आटा क्षेत्र की स्थिति इसका बड़ा उदाहरण है। यहां आटा से अकोढ़ी मार्ग की मरम्मत डेढ़ साल पहले ही की गई थी। पीडब्ल्यूडी खंड-3 ने करीब 4.6 किलोमीटर सड़क पर 40 लाख रुपये खर्च किए, लेकिन निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। लगभग 800 मीटर हिस्सा भारी ट्रैफिक के चलते मरम्मत से बाहर रह गया और अब पूरी सड़क टूट-फूटकर गहरे गड्ढों में बदल गई है।
इस सड़क से करीब 15 गांवों की 35 हजार की आबादी जुड़ी है, जिन्हें रोजाना इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है। गहरे गड्ढों के कारण हादसे आम हो गए हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि मरम्मत के समय थोड़ी राहत जरूर मिली थी, लेकिन अब हालात पहले से भी बदतर हैं। वाहन तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।

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