देश को मिला नया CJI – जस्टिस सूर्यकांत

देश की न्यायपालिका को नया नेतृत्व मिल गया है। सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस सूर्यकांत को भारत के 53वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ दिलाई। इस मौके पर उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और कई बड़े नेता व मंत्री शामिल हुए। शपथ ग्रहण के साथ ही सुप्रीम कोर्ट की कमान अब जस्टिस सूर्यकांत के हाथों में आ गई है।

साधारण परिवार से न्यायपालिका की ऊँचाइयों तक

हरियाणा के हिसार में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत का बचपन साधारण परिवार में बीता। सरकारी स्कूल में पढ़ाई और फिर मेहनत के बल पर उन्होंने क़ानून की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वकालत की शुरुआत हिसार में की और अपनी मेहनत व प्रतिभा के बल पर जल्द ही पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में छाप छोड़ दी। पूर्व सीजेआई जस्टिस बी. आर. गवई ने भी विदाई भाषण में उनकी तारीफ की थी। उन्होंने कहा कि दोनों साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और यही अनुभव उन्हें संवेदनशील व न्यायप्रिय बनाता है।

वकालत में पहचान और प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ

क़ानून की दुनिया में उनका सफर लंबा और प्रभावशाली रहा। वकालत में सफलता के बाद उन्हें कम उम्र में ही हरियाणा का एडवोकेट जनरल बनने का अवसर मिला। जिम्मेदार भूमिकाओं में रहकर उन्होंने कानून और प्रशासन दोनों में अपनी दक्षता दिखाई। सिर्फ पढ़ाई पूरी करने के बाद रुकने वाले नहीं थे। उन्होंने आगे की पढ़ाई भी जारी रखी और लॉ में मास्टर्स कर उत्कृष्ट प्रदर्शन से शीर्ष स्थान हासिल किया।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच और अब देश की सबसे बड़ी कुर्सी

जस्टिस सूर्यकांत को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में जज बने। अब वे देश की न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर पहुँच चुके हैं। उनसे अब न्याय प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और गति लाने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। 

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