Jalaun : पराली जलाने पर कई किसानों पर कार्रवाई

उरई। जिले में पराली जलाने के मामलों पर अब प्रशासन सख्त हो गया है। रविवार को कृषि विभाग की टीम ने अभियान चलाते हुए कई गांवों में खेतों का निरीक्षण किया और नियमों की अनदेखी करने वाले किसानों को चेतावनी दी।

अधिकारियों ने गांवों में किया निरीक्षण

तहसीलदार और उप कृषि निदेशक की अगुवाई में अधिकारियों की टीम ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंची। टीम ने खेतों का जायजा लेते हुए किसानों को समझाया कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी कम होती है। अधिकारियों ने किसानों से आग्रह किया कि वे फसल अवशेष को जलाने के बजाय उसका समुचित प्रबंधन करें।

पराली जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित

अधिकारियों ने किसानों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की जानकारी देते हुए कहा कि पराली जलाना प्रतिबंधित है और ऐसा करने पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि पराली को खाद, चारे या जैविक उर्वरक के रूप में पुनः उपयोग में लाया जा सकता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ खेतों की गुणवत्ता भी बनी रहती है।

जागरूकता पर जोर दे रहा विभाग

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खेतों में पराली जलाने की घटनाएं फसल कटाई के बाद बढ़ जाती हैं। इसलिए विभाग लगातार गांवों में जाकर किसानों को जागरूक कर रहा है। उन्हें आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से पराली प्रबंधन के तरीके समझाए जा रहे हैं।

किसानों से की गई अपील

अधिकारियों ने कहा कि विभाग का उद्देश्य किसानों पर दंड लगाना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक करना है ताकि वे पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभा सकें। किसानों से अनुरोध किया गया कि वे खेतों में पराली जलाने के बजाय उसका पर्यावरणहितैषी विकल्प अपनाएं।

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