Jhansi: रानी लक्ष्मीबाई के किले में उमड़ा जनसैलाब, जन्मोत्सव पर देश-विदेश के मेहमान हुए मंत्रमुग्ध

झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई के जन्मोत्सव और विश्व धरोहर दिवस ने बुधवार को ऐसा रंग भरा कि ऐतिहासिक किला और रानी महल, पर्यटकों से खचाखच भर गए। खास बात यह रही कि दोनों धरोहरों में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रहा, जिसकी वजह से सुबह से ही शहर में घूमते पर्यटकों का रुख रानी के किले और महल की ओर मुड़ता दिखाई दिया।


हर तरफ रौनक ही रौनक

जैसे ही सुबह के समय किले के द्वार खुले, स्थानीय लोग, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी, परिवार और पर्यटकों का बढ़ता हुआ कारवां ऐतिहासिक धरोहर की ओर बढ़ने लगा। गलियारों, आंगनों और प्राचीन दीवारों के सामने लोग सेल्फी और फोटो खिंचवाते दिखे। रानी लक्ष्मीबाई के साहस से जुड़े किस्सों को गाइड बड़ी शिद्दत से सुनाते रहे, और लोग तन्मयता से सुनते रहे। बच्चे रानी लक्ष्मीबाई की कहानियों में खोए दिखे तो बड़ों के चेहरे पर गौरव और भावनाओं की चमक साफ नजर आई।

विदेशी मेहमान भी हुए किले के दीवाने

देश ही नहीं, परदेस से आए सैलानियों ने भी झांसी के गौरव को नजदीक से देखा। कई विदेशी पर्यटक किले की भव्यता और युद्धकालीन वास्तुकला से प्रभावित नजर आए। उनका प्रवेश भी निशुल्क रखा गया, जिससे उत्साह और बढ़ गया।

कुछ विदेशी पर्यटकों ने कहा कि यहां का माहौल वीरता और इतिहास की खुशबू से भरा महसूस होता है। कई घण्टों तक वे महल और किले के हर हिस्से में घूमते रहे और झांसी की रानी के संघर्ष को समझने का प्रयास करते रहे।

सुरक्षा और सफाई पर भी विशेष इंतज़ाम

बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुरातत्व विभाग ने पूरे परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए। प्रवेश द्वार से लेकर अंदर तक कर्मचारी तैनात रहे, ताकि पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। परिसर में स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखने की भी पूरी तैयारी की गई।

दीपांजलि से जगमगाया किला

शाम होते-होते किला दीपों की रोशनी में नहाने लगा। दीपांजलि का दृश्य ऐसा था कि वहां मौजूद हर शख्स के लिए यह दृश्य हमेशा की स्मृतियों में दर्ज हो गया। रोशनी, संगीत और ऐतिहासिक माहौल ने लोगों को रानी लक्ष्मीबाई की वीरता के युग में लौटा दिया।


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