Sagar: 400 साल पुराने देव खंडेराव अग्नि मेला में पहले दिन 151 श्रद्धालुओं ने नंगे पैर दहकते अंगारों पर चलकर जताई आस्था |

मध्य प्रदेश के सागर जिले में आस्था और परंपरा का संगम माना जाने वाला देव खंडेराव अग्नि मेला एक बार फिर पूरे गरिमा के साथ शुरू हो गया है। देवरी की ऐतिहासिक धरती पर हर साल की तरह इस बार भी मेले की शुरुआत अद्भुत दृश्य के साथ हुई। जैसे ही मेला प्रारंभ हुआ, वातावरण में भक्तिमय ऊर्जा फैल गई और श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।

अग्नि पर चलता विश्वास

मेले की सबसे प्रमुख परंपरा अग्नि से जुड़े अनुष्ठान की मानी जाती है। पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और लोग इसे अपने विश्वास की कसौटी मानते हैं। जब भक्त अग्निकुंड में कदम रखते हैं, तो आसपास खड़ा प्रत्येक व्यक्ति इसे चमत्कार और आस्था की शक्ति का रूप मानता है। ऐसा दृश्य हर किसी को भावविभोर कर देता है।

आस्था और आकर्षण का वार्षिक पर्व

देव खंडेराव अग्नि मेला न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत का भी एक बड़ा हिस्सा है। दूर-दूर से लोग यहां पहुंचकर इस आयोजन के साक्षी बनते हैं। अंगारों पर चलने की यह परंपरा जब भी दोहराई जाती है, लोगों की भावनाएं इससे गहराई से जुड़ जाती हैं। मेले के दौरान होने वाले अनुष्ठान, भजन और लोक परंपराएं वातावरण को अलौकिक बना देती हैं।

शुरुआत ने ही बढ़ाया रोमांच

पहले ही दिन मेले की शुरुआत जितनी मजबूत और भावनात्मक रही, उससे आने वाले दिनों में भीड़ और उत्साह और बढ़ने की संभावना है। स्थानीय लोगों से लेकर बाहर से पहुंचे आगंतुकों तक, हर किसी की नजर अग्नि परंपरा और उससे जुड़े आयोजनों पर टिकी है। देव खंडेराव की इस अनोखी परंपरा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आस्था हर बाधा से बड़ी होती है।

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