हमीरपुर में क्रिसमस की पूर्व संध्या पर सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल का परिसर बच्चों की खुशियों से गुलजार नजर आया। स्कूल में आयोजित बाल मेले में नन्हे विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशक्ति और हुनर का शानदार प्रदर्शन किया। पूरे आयोजन में उत्साह, सीख और आनंद का सुंदर मेल देखने को मिला।
नन्हे हाथों ने संभाले स्टॉल, दिखा आत्मविश्वास
बाल मेले में बच्चों ने खुद ही खानपान, खेल और मनोरंजन से जुड़े स्टॉल लगाए। स्टॉल को सजाने से लेकर आगंतुकों से बातचीत तक, हर जिम्मेदारी बच्चों ने उत्साह के साथ निभाई। अभिभावक जब बच्चों के स्टॉल पर पहुंचे तो उनके चेहरों पर गर्व साफ दिखाई दिया। बच्चों का यह प्रयास उनके आत्मविश्वास और सीखने की इच्छा को दर्शाता रहा।
खानपान और खेल ने खींचा सबका ध्यान
मेले में बच्चों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न व्यंजन और खेल गतिविधियां आकर्षण का केंद्र रहीं। रंग-बिरंगे पोस्टर, सजे हुए स्टॉल और बच्चों की मुस्कान ने पूरे परिसर को जीवंत बना दिया। मेले में घूमते हुए अभिभावक और शिक्षक बच्चों के प्रयासों की सराहना करते नजर आए।
नृत्य और गीतों से सजा सांस्कृतिक मंच
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने नृत्य और गायन की प्रस्तुति देकर माहौल को और खुशनुमा बना दिया। रंगीन परिधानों में सजे बच्चे मंच पर आत्मविश्वास के साथ उतरे। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया और तालियों की गूंज से पूरा परिसर भर उठा।
स्कूल प्रशासन ने बताया सीखने का मंच
स्कूल प्रशासन ने बाल मेले को बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अहम बताया। उनका कहना रहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में रचनात्मक सोच, जिम्मेदारी और सामाजिक व्यवहार को बढ़ावा देते हैं। यह मंच बच्चों को किताबों से आगे सीखने का अवसर देता है।
अभिभावकों की भागीदारी से बढ़ा उत्साह
अभिभावकों ने बच्चों के स्टॉल से खरीदारी कर उनका हौसला बढ़ाया। बच्चों की मेहनत देखकर अभिभावक भावुक और खुश नजर आए। सभी के सहयोग से यह बाल मेला एक यादगार आयोजन बन गया।
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