बुंदेलखंड राज्य की मांग टोल फ्री नंबर पर दर्ज कराएं समिति ने 'मन की बात' कार्यक्रम से जोड़ा अभियान

बुंदेलखंड राज्य की मांग: 'मन की बात' से जोड़ा अभियान | Toll Free 1800-11-7800
🗺️ बुंदेलखंड राज्य आंदोलन · जन अभियान
बांदा / बीरा · समाचार डेस्क
🔔 बड़ी खबर
🗺️ बुंदेलखंड राज्य की मांग — मन की बात टोल फ्री नंबर 1800-11-7800 पर दर्ज कराएं  •  राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय का आह्वान  •  40-45 सेकंड में रिकॉर्ड करें अपनी बात  •  14 जिलों में चला रहे हैं अभियान  •  1956 का ऐतिहासिक अन्याय सुधारने की मांग  •  जंतर मंतर तक पहुंच चुका है बुंदेलखंड आंदोलन  • 
🗺️ बुंदेलखंड राज्य 📻 मन की बात अभियान ⚖️ जन आंदोलन 28 मार्च 2026

बुंदेलखंड राज्य की मांग टोल फ्री पर दर्ज कराएं —
समिति ने 'मन की बात' से जोड़ा अभियान

बुंदेलखंड राष्ट्र समिति ने अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम 'मन की बात' से जोड़ते हुए नागरिकों से टोल फ्री नंबर 1800-11-7800 पर कॉल करके राज्य निर्माण की मांग दर्ज कराने का आह्वान किया है। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय के निर्देश पर बुंदेलखंड के सभी जिलों में यह अभियान शुरू किया गया है।

📞 मन की बात — टोल फ्री नंबर
1800-11-7800

बीप सुनाई देने के बाद — 40 से 45 सेकंड में अपनी बात रिकॉर्ड करें।
एक व्यक्ति अधिकतम 2 बार कॉल करके मांग दर्ज करा सकता है।
संदेश हिंदी या अंग्रेजी में रिकॉर्ड करें। पहले से लिखकर तैयार रखें।

01
1800-11-7800 डायल करें
02
बीप सुनें, रिकॉर्ड करें
40s
सेकंड में मांग रिकॉर्ड
2x
अधिकतम 2 बार कॉल
🗺️ अलग बुंदेलखंड राज्य 📻 मन की बात से जोड़ा अभियान 📞 Toll Free: 1800-11-7800 14 जिले · UP + MP 🕊️ शांतिपूर्ण जन आंदोलन 50+ बार खून से पत्र

🗺️ बुंदेलखंड — भूगोल और पहचान

बुंदेलखंड क्षेत्र का नक्शा — जिले
बुंदेलखंड के जिले
भारत के नक्शे में बुंदेलखंड की स्थिति
भारत में बुंदेलखंड की स्थिति (नारंगी रंग)

📍 बुंदेलखंड — दो राज्यों में विभाजित क्षेत्र

बुंदेलखंड भारत के मध्य में स्थित एक ऐतिहासिक क्षेत्र है जो उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में फैला हुआ है। 1956 के राज्य पुनर्गठन में इस क्षेत्र को दो हिस्सों में बांट दिया गया, जिसके बाद से यह क्षेत्र विकास में लगातार उपेक्षित रहा है।

भौगोलिक विशेषता: सूखाग्रस्त भूमि, विंध्य पर्वत श्रेणी, बेतवा, केन, सोन जैसी नदियां और विशिष्ट बुंदेली संस्कृति। क्षेत्र की अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान है — बुंदेली भाषा, लोक संगीत, हस्तशिल्प और ऐतिहासिक धरोहर।

समिति का कहना है कि बुंदेलखंड की समस्याओं का स्थायी समाधान केवल अलग राज्य से संभव है। दिल्ली के जंतर मंतर पर महाधरना हो चुका है। प्रवीण पांडेय ने रिकॉर्ड 50 बार खून से पत्र लिखकर यह मांग उठाई है।

📋 बुंदेलखंड के 14 जिले

🟠

उत्तर प्रदेश के जिले (8 जिले)

झांसी
Jhansi
जालौन
Jalaun (Orai)
ललितपुर
Lalitpur
महोबा
Mahoba
बांदा
Banda
हमीरपुर
Hamirpur
चित्रकूट
Chitrakoot
फतेहपुर
Fatehpur (प्रस्तावित)
🟢

मध्य प्रदेश के जिले (7 जिले)

सागर
Sagar
दमोह
Damoh
पन्ना
Panna
छतरपुर
Chhatarpur
टीकमगढ़
Tikamgarh
दतिया
Datia
निवाड़ी
Niwari

⚠️ बुंदेलखंड की मुख्य समस्याएं — क्यों चाहिए अलग राज्य?

💧
जल संकट
सूखाग्रस्त क्षेत्र। पेयजल और सिंचाई दोनों की भारी कमी। किसान बेहाल।
👦
बेरोजगारी
युवाओं के लिए रोजगार की अपार कमी। पलायन की दर बेहद ऊंची।
🚶
पलायन
हर साल हजारों लोग रोजगार की तलाश में दिल्ली-मुंबई पलायन करते हैं।
🌾
कृषि संकट
पानी की कमी, सूखा और कृषि आय में भारी गिरावट। किसान आत्महत्याएं।
📉
विकास असमानता
दोनों राज्यों की सीमाओं पर होने से विकास की भारी उपेक्षा।
🏛️
1956 का अन्याय
राज्य पुनर्गठन में बुंदेलखंड को UP-MP में बांटा गया। ऐतिहासिक भूल।

📞 मन की बात पर कॉल कैसे करें — पूरी जानकारी

01
1800-11-7800 डायल करें — टोल फ्री, कोई शुल्क नहीं।
02
बीप सुनाई देने का इंतजार करें। फिर बोलना शुरू करें।
03
40-45 सेकंड में संक्षिप्त, स्पष्ट और मुद्दे पर बात रिकॉर्ड करें।
💡 सुझाव: कॉल करने से पहले अपनी बात लिखकर तैयार रखें। सुझाई गई बात: "मैं पीएम मोदी जी से बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने की मांग करता/करती हूं। इससे जल संकट, बेरोजगारी और पलायन की समस्या का स्थायी समाधान होगा।" एक व्यक्ति अधिकतम 2 बार कॉल करके अपना संदेश दर्ज करा सकता है।

📰 पूरी खबर: बुंदेलखंड राष्ट्र समिति का 'मन की बात' अभियान

बुंदेलखंड राष्ट्र समिति ने अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। समिति ने इस मांग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम 'मन की बात' से जोड़ते हुए नागरिकों से टोल फ्री नंबर 1800-11-7800 पर कॉल करके राज्य निर्माण की मांग दर्ज कराने का आह्वान किया है। यह अभियान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय के निर्देश पर बुंदेलखंड के सभी जिलों में शुरू किया गया है।

बुंदेलखंड राष्ट्र समिति ने यह कदम उस समय उठाया है जब क्षेत्र में अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन लगातार जारी है। समिति का मानना है कि 'मन की बात' कार्यक्रम में प्राप्त जन सुझावों का आधिकारिक रूप से डेटा संकलित किया जाता है और इन सुझावों को सरकार के उच्चतम स्तर तक पहुँचाया जाता है। इसलिए, इस लोकप्रिय कार्यक्रम के माध्यम से बुंदेलखंड की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से पहुँचाने का यह एक सुनहरा अवसर है।

समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय ने बताया कि 'मन की बात' कार्यक्रम के लिए टोल फ्री नंबर 1800-11-7800 जारी किया गया है। इस नंबर पर कॉल करके कोई भी नागरिक अपनी बात दर्ज करा सकता है। उन्होंने बताया कि कॉल करने पर एक बीप सुनाई देने के बाद नागरिकों को 40 से 45 सेकंड के भीतर अपनी बात रिकॉर्ड करानी होती है। सीमित समय को देखते हुए, समिति ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अपनी बात संक्षेप, स्पष्ट और मुद्दे पर केंद्रित रखें।

प्रवीण पांडेय ने जोर देकर कहा कि बुंदेलखंड राज्य के गठन से क्षेत्र की दशकों पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव हो पाएगा। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड आज भी जल संकट, बेरोजगारी, पलायन, कृषि संकट और विकास में असमानता जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। अलग राज्य बनने से इन समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया जा सकेगा और क्षेत्र का विकास तेज गति से हो सकेगा।

समिति ने इस अभियान को जन-जन तक पहुँचाने की योजना बनाई है। प्रवीण पांडेय ने बुंदेलखंड के युवाओं, किसानों, महिलाओं, व्यापारियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जितने अधिक लोग इस टोल फ्री नंबर पर कॉल करेंगे, उतना ही मजबूत यह संदेश सरकार तक पहुँचेगा।

बुंदेलखंड राष्ट्र समिति ने यह स्पष्ट किया है कि यह अभियान पूर्ण रूप से शांतिपूर्ण और जनआंदोलन के माध्यम से चलाया जा रहा है। समिति का मानना है कि लोकतांत्रिक तरीकों से सरकार तक मांग पहुँचाना ही सबसे प्रभावी माध्यम है। प्रधानमंत्री के 'मन की बात' कार्यक्रम को इस अभियान का माध्यम बनाकर समिति ने एक ऐसा रास्ता चुना है जो सीधे जनता की आवाज को सरकार के उच्चतम स्तर तक पहुँचाने का काम करता है।

बुंदेलखंड क्षेत्र में अलग राज्य की मांग वर्षों से उठती रही है। यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में फैला हुआ है, लेकिन दोनों राज्यों की सीमाओं पर होने के कारण यहाँ के विकास की उपेक्षा होती रही है। समिति के संगठन महामंत्री यज्ञेश गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय विकास तभी संभव है जब क्षेत्रीय असंतुलन को समाप्त किया जाए।

बुंदेलखंड राष्ट्र समिति ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के सभी जिलों में जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ता गाँव-गाँव जाकर लोगों को इस टोल फ्री नंबर के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस अभियान को व्यापक प्रचार दिया जा रहा है, ताकि युवा पीढ़ी अधिक से अधिक संख्या में इससे जुड़ सके।

प्रवीण पांडेय ने कहा कि बुंदेलखंड की जनता की यह आवाज अब 'मन की बात' के जरिए प्रधानमंत्री तक सीधे पहुँचेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुंदेलखंड की समस्याओं को गंभीरता से लेंगे और इस मांग पर सकारात्मक विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड राज्य निर्माण का यह आंदोलन अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है और सभी को मिलकर इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए।

💬 समिति नेताओं की प्रतिक्रिया

"

बुंदेलखंड राज्य की मांग कोई भावनात्मक विषय नहीं, बल्कि संतुलित राष्ट्रीय विकास से जुड़ा संवैधानिक प्रश्न है। 1956 के राज्य पुनर्गठन में बुंदेलखंड के साथ ऐतिहासिक अन्याय हुआ जिसे अब सुधारना आवश्यक है। इस क्षेत्र के युवाओं, किसानों और श्रमिकों को लंबे समय से उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है — पृथक राज्य ही उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान है।

प्रवीण पांडेय 'बुंदेलखंडी' राष्ट्रीय अध्यक्ष, बुंदेलखंड राष्ट्र समिति
"

राष्ट्रीय विकास तभी संभव है जब क्षेत्रीय असंतुलन को समाप्त किया जाए। राज्य पुनर्गठन को लेकर केंद्र सरकार को समयबद्ध एवं ठोस नीति घोषित करनी चाहिए। बिना पृथक राज्य के बुंदेलखंड के लोगों की समस्याएं हल नहीं हो सकतीं।

यज्ञेश गुप्ता संगठन महामंत्री, बुंदेलखंड राष्ट्र समिति

📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि — 1956 का विभाजन

1956 के राज्य पुनर्गठन आयोग ने भाषाई आधार पर राज्यों का गठन किया। इस प्रक्रिया में बुंदेलखंड को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बांट दिया गया। बुंदेलखंड राष्ट्र समिति का मानना है कि यह क्षेत्र की भौगोलिक, सांस्कृतिक और आर्थिक एकता के विरुद्ध था। दोनों राज्यों की सीमाओं पर होने के कारण बुंदेलखंड को न UP की प्राथमिकता मिली, न MP की — विकास की दोहरी उपेक्षा झेलनी पड़ी। आंदोलन की मांग है कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के साथ बुंदेलखंड को अलग राज्य का दर्जा दिया जाए।

🙏 किनसे अपील — सभी वर्गों को जोड़ें

👨‍🌾
किसान
👦
युवा
👩
महिलाएं
🏪
व्यापारी
🏫
सामाजिक संगठन
📱
युवा — सोशल मीडिया

परिवार, मित्रों और पड़ोसियों को भी 1800-11-7800 पर कॉल करने के लिए प्रेरित करें। ग्रामीण क्षेत्रों तक भी यह संदेश पहुँचाएं — जहाँ मोबाइल नेटवर्क कमजोर है, वहाँ भी समिति कार्यकर्ता जानकारी दे रहे हैं।

🏆 बुंदेलखंड आंदोलन की बड़ी उपलब्धियां

50+ बार खून से पत्र — प्रवीण पांडेय ने रिकॉर्ड 50 बार अपने खून से पत्र लिखकर मांग उठाई। दिल्ली के जंतर मंतर पर राष्ट्रीय राज्य पुनर्गठन महाधरना आयोजित। पूर्वांचल, विदर्भ, मराठवाड़ा जैसे अन्य राज्य आंदोलनों के साथ एकजुटता। सोशल मीडिया और जनसंवाद के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर मांग उठाई।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ