सौर फेंसिंग योजना: बुंदेलखंड के किसानों को 80% अनुदान, 31 मार्च तक कर सकेंगे आवेदन

 बुंदेलखंड क्षेत्र में फसलों को आवारा एवं जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए शासन द्वारा शुरू की गई सौर फेंसिंग योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों के पास अब अंतिम मौका है। इस योजना के तहत किसानों को 80 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा, जबकि शेष 20 प्रतिशत राशि उन्हें स्वयं वहन करनी होगी। उप कृषि निदेशक कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 निर्धारित की गई है।

Farmers in Bundelkhand utilizing the 80% subsidy Solar Fencing Scheme to protect crops from wild animals, featuring solar-powered electric fencing and Moringa (Sahjan) plantation in a 10-hectare cluster model.


यह योजना विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए शुरू की गई है, जहाँ वर्षों से नीलगाय, सूअर, जंगली जानवरों और आवारा पशुओं द्वारा फसलों को भारी क्षति पहुँचाने की समस्या बनी हुई है। उप कृषि निदेशक एस.के. उत्तम ने बताया कि इस योजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक से लैस सौर फेंसिंग उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनकी फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। उन्होंने कहा कि सौर फेंसिंग प्रणाली में सौर ऊर्जा से संचालित विद्युत फेंसिंग लगाई जाती है, जो जानवरों को फसलों के पास आने से रोकती है। यह तकनीक पूरी तरह से सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल है तथा बिजली की अनुपलब्धता वाले क्षेत्रों में भी प्रभावी रूप से कार्य करती है।


योजना के तहत किसानों को 10 हेक्टेयर के क्लस्टर में समूह बनाकर आवेदन करना अनिवार्य है। किसानों को पहले समूह गठन करना होगा, जिसके बाद क्लस्टर के अध्यक्ष विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इस प्रणाली से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सौर फेंसिंग का लाभ बड़े भू-भाग पर सामूहिक रूप से मिल सके, जिससे इसकी प्रभावशीलता भी बढ़ेगी। उप कृषि निदेशक ने बताया कि अब तक आवेदन प्रक्रिया जारी है और 31 मार्च तक किसान ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। यदि लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो लॉटरी के माध्यम से किसानों का चयन किया जाएगा।


किसानों की सुविधा के लिए योजना के तहत तीन अलग-अलग मॉडल तैयार किए गए हैं। पहले मॉडल में कुल लागत लगभग 10.87 लाख रुपये आंकी गई है, जिसमें 8.69 लाख रुपये का अनुदान सरकार द्वारा दिया जाएगा। दूसरे मॉडल की कुल लागत लगभग 11.64 लाख रुपये है, जिसमें भी 80 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा। तीसरे मॉडल की कुल लागत लगभग 8.79 लाख रुपये है। इन तीनों मॉडलों में किसानों को गेट, सोलर पैनल, फेंसिंग वायर सहित अन्य सभी आवश्यक सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी। किसान अपनी सुविधा और आवश्यकता के अनुसार किसी भी मॉडल का चयन कर सकते हैं।


इस योजना की एक अनूठी विशेषता यह भी है कि चयनित किए गए क्लस्टरों में सौर फेंसिंग के साथ-साथ 500 सहजन के पौधे भी रोपण किए जाएंगे। उप कृषि निदेशक ने बताया कि इस पहल से जल एवं भूमि संरक्षण में लाभ होगा, साथ ही सहजन के पौधों से किसानों को अतिरिक्त आय का साधन भी मिल सकेगा। सहजन के पौधों का रोपण पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भूमि की उर्वरता बढ़ाने और जल संरक्षण में सहायक होते हैं। इस प्रकार यह योजना न केवल फसल सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि दीर्घकालिक पर्यावरणीय लाभ भी सुनिश्चित करती है।


आवेदन प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन होगी। किसानों को सबसे पहले अपने क्षेत्र के अन्य किसानों के साथ मिलकर 10 हेक्टेयर का क्लस्टर बनाना होगा। इसके बाद क्लस्टर के अध्यक्ष विभागीय पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान भूमि के कागजात, समूह के सदस्यों की सूची, आधार कार्ड आदि दस्तावेज संलग्न करने होंगे। आवेदनों की संख्या लक्ष्य से अधिक होने की स्थिति में लॉटरी प्रणाली के माध्यम से पारदर्शी तरीके से किसानों का चयन किया जाएगा। चयनित किसानों को विभाग द्वारा सूचित कर दिया जाएगा, जिसके बाद चयनित क्लस्टरों में सौर फेंसिंग और सहजन के पौधों का रोपण कार्य शुरू किया जाएगा।


उप कृषि निदेशक एस.के. उत्तम ने सभी किसानों से अपील की है कि वे इस योजना का लाभ उठाने के लिए शीघ्र आवेदन कर दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि 31 मार्च के बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग के कार्यालय से भी आवेदन से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना बुंदेलखंड के किसानों की आय बढ़ाने और फसल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 80 प्रतिशत का अनुदान किसानों के लिए एक बड़ी राहत है, जिससे वे कम लागत में आधुनिक सुरक्षा प्रणाली स्थापित कर सकते हैं।


कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बुंदेलखंड जैसे अर्ध-शुष्क क्षेत्र में जहाँ खेती पहले से ही चुनौतीपूर्ण है, वहाँ जंगली जानवरों से फसल सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। सौर फेंसिंग तकनीक न केवल प्रभावी है, बल्कि दीर्घकालिक दृष्टि से आर्थिक रूप से भी सार्थक है। 80 प्रतिशत अनुदान इसे किसानों के लिए और भी अधिक सुलभ बनाता है। सहजन के पौधों का रोपण एक सराहनीय पहल है, क्योंकि सहजन की खेती से कम समय में अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है, जिससे किसानों की आय के स्रोतों में विविधता आएगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।


कृषि विभाग ने सभी इच्छुक किसानों से अनुरोध किया है कि वे इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाएँ और समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें। यह योजना बुंदेलखंड के किसानों को फसल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और अतिरिक्त आय के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करने का एक सशक्त माध्यम है।

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