बुंदेलखंड क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा के अभाव को लेकर खजुराहो से सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने लोकसभा में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और तकनीकी शिक्षा के विस्तार की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए केंद्र सरकार से बुंदेलखंड में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जैसे प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थान की स्थापना करने की मांग की।
सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने लोकसभा में अपनी बात रखते हुए कहा कि बुंदेलखंड का विशाल भौगोलिक क्षेत्र और यहाँ की बड़ी युवा आबादी को देखते हुए यहाँ उच्च शिक्षा के सीमित अवसर चिंता का विषय हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बुंदेलखंड क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रदेश के अन्य शहरों या राज्यों के बाहर जाना पड़ता है, जिससे न केवल उन्हें आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है, बल्कि प्रतिभाशाली छात्रों का एक बड़ा वर्ग उच्च शिक्षा से वंचित भी रह जाता है।
सांसद ने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में यदि एनआईटी जैसा कोई प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान स्थापित होता है, तो इससे यहाँ के युवाओं को घर के पास ही विश्व स्तरीय शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस तरह के संस्थान की स्थापना से न केवल शैक्षणिक क्षेत्र में बल्कि संपूर्ण बुंदेलखंड के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति मिलेगी। उनका कहना था कि एक बड़ा तकनीकी संस्थान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करेगा, उद्योगों के विकास को प्रोत्साहन देगा और क्षेत्र के समग्र विकास में सहायक होगा।
सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने इस मुद्दे को लोकसभा में रखते हुए केंद्र सरकार से ज्ञापन दिया कि बुंदेलखंड को लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की मांग की जाती रही है, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में अब भी यहाँ काफी कमी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना पर विशेष ध्यान दिया है, और अब बुंदेलखंड की बारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार इस आवश्यकता को समझेगी और जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
सांसद के इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सदन में सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने सांसद द्वारा उठाई गई मांग को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि इस विषय पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और जल्द ही उचित निर्णय लिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार सभी क्षेत्रों के समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है और बुंदेलखंड जैसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाले क्षेत्र में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस आश्वासन के बाद सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने संतोष व्यक्त किया और कहा कि बुंदेलखंड के लाखों युवाओं की आशाएँ अब इस निर्णय से जुड़ी हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार इस मामले में शीघ्र ही ठोस कदम उठाएगी और बुंदेलखंड में उच्च शिक्षा के नए अध्याय की शुरुआत होगी।
उल्लेखनीय है कि बुंदेलखंड क्षेत्र में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों के कई जिले शामिल हैं, लेकिन यहाँ पर अब तक कोई बड़ा केंद्रीय तकनीकी संस्थान स्थापित नहीं हो पाया है। स्थानीय शिक्षाविदों और नागरिक संगठनों ने भी लंबे समय से इस क्षेत्र में एनआईटी या भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे संस्थान की स्थापना की मांग की जा रही थी। सांसद विष्णुदत्त शर्मा द्वारा लोकसभा में इस मुद्दे को उठाने से इस मांग को अब नई गति मिली है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बुंदेलखंड जैसे आर्थिक रूप से पिछड़े और प्राकृतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में किसी प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान की स्थापना से यहाँ के युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा प्राप्त होगी और क्षेत्र के समग्र विकास में यह मील का पत्थर साबित हो सकता है। इसके साथ ही यह संस्थान अनुसंधान और नवाचार का केंद्र भी बन सकता है, जिससे बुंदेलखंड की विशिष्ट समस्याओं जैसे जल संकट, कृषि चुनौतियों आदि के समाधान के लिए भी तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि वे इस मुद्दे को लगातार उठाते रहेंगे और केंद्र सरकार से बुंदेलखंड के युवाओं के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर जल्द से जल्द निर्णय लेने का आग्रह करेंगे। उन्होंने कहा कि एक बार एनआईटी या समकक्ष संस्थान की स्थापना हो जाने के बाद, न केवल शिक्षा का क्षेत्र समृद्ध होगा, बल्कि पूरा बुंदेलखंड विकास की नई ऊँचाइयों को छू सकेगा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के आश्वासन के बाद अब बुंदेलखंड क्षेत्र के नागरिकों, शिक्षाविदों और छात्रों में इस मुद्दे को लेकर काफी उत्साह है। स्थानीय स्तर पर विभिन्न संगठनों ने भी सांसद के इस कदम का स्वागत किया है और केंद्र सरकार से जल्द से जल्द इस पर निर्णय लेने की मांग की है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में बुंदेलखंड के शैक्षणिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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