बुंदेलखंड में हर घर जल योजना की पड़ताल को पहुंची IIT मद्रास की टीम, सकारात्मक बदलाव और चुनौतियां दोनों मिली


सूखा प्रभावित बुंदेलखंड क्षेत्र में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर जल’ योजना की जमीनी हकीकत जानने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास की एक विशेषज्ञ टीम ने बांदा जिले का दौरा किया। टीम ने मंगलवार को जिले के अलग-अलग गांवों का स्थलीय निरीक्षण किया और ग्रामीणों से जलापूर्ति की वास्तविक स्थिति पर चर्चा की।


IIT मद्रास के सामाजिक कार्य विभाग की इस टीम ने बांदा जिले के अदरी, लसड़ा, डांडामऊ सहित कुल 15 गांवों का निरीक्षण किया। डॉ. गजल श्रीवास्तव और डॉ. त्रिलोक बलोदी के नेतृत्व में टीम ने प्रधानमंत्री के ‘जल जीवन मिशन’ के तहत चल रही ‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना के प्रभाव का आकलन किया। यह मूल्यांकन इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि यह किसी बाहरी स्वतंत्र संस्था द्वारा किया जा रहा था, जिससे योजना की सफलताओं और कमियों के बारे में एक तटस्थ रिपोर्ट तैयार हो सकेगी।


स्कूलों में स्वच्छ पानी से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार


निरीक्षण के दौरान टीम ने ग्रामीण स्कूलों का भी दौरा किया। यह देखकर टीम के सदस्य काफी प्रभावित हुए कि स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता का बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवहार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। नियमित जलापूर्ति से स्कूलों की साफ-सफाई भी बेहतर हुई है। यह बदलाव बच्चों के समग्र विकास के लिए बेहद अहम है, क्योंकि बीमारियों में कमी से उनकी उपस्थिति और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में सुधार हुआ है।


चुनौतियां भी सामने आईं, कई गांवों में जलापूर्ति ठप


हालांकि, निरीक्षण के दौरान सभी परिणाम सकारात्मक नहीं रहे। टीम ने कई गांवों में जलापूर्ति बंद पाई, जबकि कुछ स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त मिली। ग्रामीणों को एक-एक बाल्टी पानी के लिए तरसते देखा गया। इसके अलावा, पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों को बिना ठीक किए छोड़ दिया गया था, जिससे आवागमन में कठिनाइयां पैदा हो रही थीं। टीम ने इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए अपनी रिपोर्ट में नोट किया और मौके पर मौजूद विभागीय अभियंताओं (जूनियर इंजीनियर और सहायक अभियंता) को आवश्यक सुझाव दिए। उन्होंने योजना के लाभ को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी रखरखाव की आवश्यकता पर बल दिया।


महिलाओं के जीवन में आया बड़ा बदलाव


इस योजना का सबसे अधिक लाभ महिलाओं को हुआ है। IIT टीम के मूल्यांकन में यह स्पष्ट हुआ कि जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन मिलने से महिलाओं को किलोमीटर दूर से पानी लाने की भागदौड़ से मुक्ति मिली है। अब वे इस समय का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, घरेलू कार्यों और आत्म-विकास में कर पा रही हैं। इससे न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है, बल्कि परिवार की आय बढ़ाने के लिए अतिरिक्त काम करने का भी समय मिला है। महिलाओं की इस राहत को टीम ने योजना की सबसे बड़ी सफलता माना।


ग्रामीणों की भागीदारी और जल गुणवत्ता पर विशेष ध्यान



IIT Madras team inspecting Har Ghar Jal Yojana in Banda, Bundelkhand. Villagers, water supply issues, pipelines, and school water facilities.

IIT टीम के अध्ययन में यह भी सामने आया कि जिन गांवों में ग्राम पेयजल एवं स्वच्छता समितियां (VWSC) सक्रिय हैं, वहां योजना के परिणाम काफी बेहतर हैं। ग्रामीण योजना के संचालन और रखरखाव में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। इसके अलावा, नए कनेक्शन और शिकायत निस्तारण के लिए पंचायत भवन और जलकल परिसर में संबंधित अधिकारियों के नाम और संपर्क विवरण प्रदर्शित पाए गए। साथ ही, जल टंकियों का संचालन नियमित मिला और पानी की गुणवत्ता जांच और क्लोरीनेशन व्यवस्था भी सक्रिय पाई गई।


कार्यदायी संस्था एनसीसी लिमिटेड, हैदराबाद द्वारा योजना के संचालन और रखरखाव से जुड़ी व्यवस्थाएं संभाली जा रही हैं। विभागीय अधिकारी भी ग्रामीणों को पेयजल के उचित उपयोग के प्रति जागरूक कर रहे हैं, जो योजना की स्थिरता के लिए एक अच्छा संकेत है।




IIT मद्रास की इस टीम का निरीक्षण केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा जल जीवन मिशन की प्रगति का आकलन करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का एक हिस्सा था। टीम द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट नीति निर्माताओं के लिए काफी अहम होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर योजना में आवश्यक सुधार किए जा सकते हैं और जिन गांवों में समस्याएं पाई गई हैं, वहां त्वरित कार्रवाई की जा सकती है। यह उम्मीद की जा रही है कि रिपोर्ट के निष्कर्षों से बुंदेलखंड जैसे अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में 'हर घर जल' योजना को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।


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