केन-बेतवा लिंक परियोजना: मुआवजे में धांधली के खिलाफ आदिवासियों का आंदोलन 11वें दिन भी उग्र



Ken-Betwa Link Project: Adivasi farmers and women protest with symbolic hanging and fast at river bed, Chhatarpur



छतरपुर,  केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken-Betwa Link Project) के डूब क्षेत्र में आने वाले आदिवासियों और किसानों का आंदोलन 11वें दिन भी जारी है। मुआवजा राशि में भारी गड़बड़ी और विस्थापन की अनिश्चितता को लेकर प्रदर्शनकारियों ने नदी के बीचों-बीच सांकेतिक फांसी लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इससे पहले वे चिता आंदोलन (सांकेतिक अंतिम संस्कार), मिट्टी आंदोलन और जल सत्याग्रह कर चुके हैं। फिलहाल प्रशासन और ग्रामीणों के बीच गतिरोध बरकरार है।

हालांकि, प्रशासन ने आंदोलनकारियों की मांगों पर सहमति जताते हुए तटस्थ अधिकारियों की टीम से सर्वे कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन आंदोलनकारी अब तक हटे नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक उन्हें पूरा न्याय नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।

मुआवजे में भेदभाव और भ्रष्टाचार का आरोप

प्रदर्शनकारी आदिवासियों और किसानों का आरोप है कि उन्हें उनकी जमीन के बदले मिलने वाली मुआवजा राशि में भेदभाव और भ्रष्टाचार किया जा रहा है। कई पीड़ितों का कहना है कि उनकी संपत्ति का सही मूल्यांकन नहीं किया गया, जबकि कुछ परिवारों को पूरी तरह से मुआवजा ही नहीं मिला है। विस्थापन के बाद पुनर्वास की कोई ठोस योजना भी नहीं दिख रही है।

एक प्रदर्शनकारी ने बताया, "हमारे पास जमीन ही नहीं रहेगी, फिर हम कहाँ जाएंगे? सरकार हमें वही राशि दे रही है, जो हमारी जमीन के असली मूल्य से बहुत कम है। कई लोगों को तो अब तक कुछ नहीं मिला है।"

सांकेतिक फांसी और उपवास से दिखाया विरोध




आंदोलन के 11वें दिन प्रदर्शनकारियों ने नदी के बीच में खड़े होकर सांकेतिक फांसी लगाई। उन्होंने उपवास, मिट्टी आंदोलन और जल सत्याग्रह भी जारी रखा। एक आदिवासी नेता ने कहा, "आज हमारे आंदोलन का 11वां दिन है। हमने सांकेतिक फांसी लगाई है। चिता आंदोलन भी जारी है। हमने उपवास रखा है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि जब तक लोगों को न्याय नहीं मिलता, उनके हक और अधिकार नहीं मिलते, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।"

प्रदर्शनकारी महिलाओं की संख्या भी काफी है। उनका कहना है कि जल, जंगल और जमीन उनके जीवन का आधार है। परियोजना के कारण ये सब छिन रहा है, लेकिन बदले में उन्हें कोई ठोस भविष्य नहीं दिख रहा है।

प्रशासन का प्रयास: जीवन रक्षक सामग्री की व्यवस्था, लेकिन गतिरोध बरकरार
प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल पर जीवन रक्षक दवाइयां, साफ पानी और भोजन की व्यवस्था की है। कलेक्टर ने कहा, "हम लगातार किसानों से अपील कर रहे हैं कि वे यहां से उठकर जाएं, क्योंकि यह एक राष्ट्रीय स्तर की महत्वाकांक्षी परियोजना है और इससे इसी क्षेत्र की संपन्नता आनी है।"

हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। एक आंदोलनकारी ने कहा, "प्रशासन ने सर्वे की बात कही है, लेकिन जब तक काम पूरा नहीं हो जाता, हम विश्वास नहीं करेंगे। हमारा आंदोलन तब तक चलता रहेगा, जब तक हमें न्याय नहीं मिलता।"

क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना?


केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken-Betwa Link Project) देश की पहली अंतर-नदी जोड़ो परियोजना है। इसके तहत मध्य प्रदेश की केन नदी के पानी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में स्थानांतरित किया जाना है। इस परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के सूखाग्रस्त इलाकों को सिंचाई और पेयजल सुविधा मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, इसके लिए कई गांवों का विस्थापन होना है, जिसका आदिवासी और किसान विरोध कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि विस्थापितों को उचित मुआवजा और पुनर्वास की सुविधाएं दी जाएंगी, लेकिन प्रभावित लोग सरकारी आश्वासनों पर भरोसा नहीं कर रहे हैं।

आगे की राह: वार्ता जारी, अगले सप्ताह तक सर्वे की उम्मीद

प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता जारी है। जिला कलेक्टर ने बताया कि सर्वे की प्रक्रिया अगले 10 दिनों में पूरी कर ली जाएगी। यदि सर्वे रिपोर्ट में गड़बड़ी पाई जाती है, तो पूरक मुआवजा दिया जाएगा।

हालांकि, प्रदर्शनकारी अभी भी हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक वास्तविक राहत नहीं मिलती, आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल, स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और सभी की निगाहें अगले कुछ दिनों में होने वाली वार्ता और सर्वे के परिणामों पर टिकी हैं।

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