लखनऊ से इंदौर तक बनेगा 530 किमी का इकोनॉमिक कॉरिडोर, पलायन पर लगेगी रोक, बुंदेलखंड में खुलेगी विकास की नई सुबह


530 km long Bundelkhand Pragati Path economic corridor connecting Lucknow to Indore via Jhansi, Lalitpur, and Sagar to boost industrial development.

बुंदेलखंड की तकदीर बदलने वाली एक महत्वाकांक्षी परियोजना ने अब जमीनी रूप लेना शुरू कर दिया है। 'बुंदेलखंड प्रगति पथ' के नाम से प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर (आर्थिक गलियारा) इस क्षेत्र को औद्योगिक विकास की पटरी पर तेज रफ्तार में दौड़ाने की तैयारी कर रहा है। यह कॉरिडोर एक्सप्रेसवे की तर्ज पर तैयार किया जाएगा और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को मध्य प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर से सीधे जोड़ेगा। इसके निर्माण से न सिर्फ बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी, बल्कि यहाँ से होने वाले पलायन पर भी बड़ी रोक लगने की उम्मीद है।


530 किलोमीटर का विकास पथ, यूपी और एमपी के कई जिले होंगे कनेक्ट


बुंदेलखंड प्रगति पथ की कुल लंबाई लगभग 530 किलोमीटर होगी। यह कॉरिडोर एक्सप्रेसवे की भांति तैयार किया जाने वाला एक औद्योगिक गलियारा है, जो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहरों को बुंदेलखंड के जरिए जोड़ेगा। प्रस्तावित यह आर्थिक गलियारा उत्तर प्रदेश के झांसी, ललितपुर और मध्य प्रदेश के सागर से होते हुए औद्योगिक नगरी देवास से कनेक्ट होने जा रहा है। इसके माध्यम से बुंदेलखंड मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, देवास और उत्तर प्रदेश के कानपुर, लखनऊ और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों से सीधे जुड़ जाएगा। इसका लाभ दोनों राज्यों में फैले बुंदेलखंड के सभी जिलों – उत्तर प्रदेश के सात और मध्य प्रदेश के छह जिलों – को होगा।


बुंदेलखंड से पलायन रोकने में मिलेगी मदद


बुंदेलखंड कृषि प्रधान इलाका है और औद्योगिक विकास में पिछड़े होने के कारण यहाँ पलायन एक बड़ी मजबूरी है। युवा रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई, पुणे जैसे शहरों का रुख करते हैं। इस एक्सप्रेस-वे के बनने से क्षेत्र में औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, जिससे स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलेंगे और पलायन की समस्या से निजात मिलेगी। प्रस्तावित कॉरिडोर क्षेत्र को एक मजबूत विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करने में सहायक होगा।


औद्योगिक विकास को मिलेगा नया आयाम, हजारों एकड़ भूमि होगी उपलब्ध


इस परियोजना को सफल बनाने के लिए बुंदेलखंड में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (BIDA) के तहत झांसी जिले के 33 गांवों में 56,662 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। इस भूमि पर औद्योगिक, आवासीय और हरित क्षेत्र का विकास किया जाएगा। इसके अलावा, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के किनारे लगभग 576 हेक्टेयर भूमि पर भव्य औद्योगिक पार्क और कॉरिडोर स्थापित किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत होगी।


रक्षा गलियारा और अन्य परियोजनाओं को मिलेगा बढ़ावा


बुंदेलखंड प्रगति पथ केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के औद्योगिक विकास की रीढ़ बनेगा। इस कॉरिडोर के माध्यम से बुंदेलखंड को दिल्ली-नागपुर औद्योगिक गलियारे (Delhi-Nagpur Industrial Corridor) और उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे (Uttar Pradesh Defence Industrial Corridor) जैसी प्रमुख परियोजनाओं से भी जोड़ा जाएगा। BIDA क्षेत्र के अंदर 250 एकड़ में एक बैटल टैंक MRO (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) सुविधा और एक युद्धक वाहन निर्माण संयंत्र प्रस्तावित है, जिससे हज़ारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।


मध्य प्रदेश की 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर योजना का हिस्सा


यह परियोजना मध्य प्रदेश सरकार की 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाने की महत्वाकांक्षी योजना का एक हिस्सा है। इन छह कॉरिडोर की कुल लंबाई 3,368 किलोमीटर होगी, जिस पर 36,483 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इन कॉरिडोर के निर्माण से प्रदेश के 55 जिले सुपर कनेक्ट हो जाएंगे और औद्योगिक निवेश, कृषि, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। बुंदेलखंड प्रगति पथ इन छह कॉरिडोर में से एक है।


पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा


इस कॉरिडोर के बनने से बुंदेलखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल जैसे खजुराहो, ओरछा, देवगढ़, कालिंजर आदि पर्यटकों के लिए अधिक सुलभ हो जाएंगे। इससे क्षेत्र के पर्यटन उद्योग को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यहाँ उत्पादित कृषि उपज और हस्तशिल्प को देश के बड़े बाजारों तक पहुँचने में आसानी होगी, जिससे स्थानीय व्यापार और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।




बुंदेलखंड प्रगति पथ क्षेत्र के विकास के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। यह परियोजना न केवल बुंदेलखंड को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से जोड़ेगी, बल्कि यहाँ के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी और पलायन की समस्या को भी कम करेगी। राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयास और बड़े पैमाने पर हो रहे निवेश से यह सपना जल्द ही साकार होगा, और बुंदेलखंड विकास की नई ऊँचाइयों को छूएगा।

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