प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के एक करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को एक पत्र लिखकर उन्हें 'नागरिक देवो भव' (नागरिक ही भगवान है) के सिद्धांत को अपनाने का संदेश दिया है। यह पत्र सिविल सेवा दिवस (21 अप्रैल) से एक दिन पहले 20 अप्रैल को लिखा गया और इसे 12 भाषाओं में जारी किया गया है। पीएम मोदी ने अपने पत्र में कहा कि 21वीं सदी बड़ी चुनौतियों के साथ-साथ अवसरों का भी समय है और रुझान हर दिन बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों और दुनिया दोनों को देश से बहुत उम्मीदें हैं।
प्रधानमंत्री ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को संदेश दिया कि शासन करुणा पर आधारित होना चाहिए और सार्वजनिक सेवा की जिम्मेदारी निभाने वालों को आजीवन सीखते रहने का एक सर्वोत्तम उदाहरण बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'नागरिक देवो भव' का सिद्धांत हर निर्णय का मूलमंत्र होना चाहिए और सरकार को अपनी क्षमता के अनुसार जनता की सेवा करनी चाहिए।
12 भाषाओं में जारी किया गया पत्र
प्रधानमंत्री का यह पत्र हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, ओडिया, गुजराती, बांग्ला, कन्नड़, पंजाबी, असमिया, मलयालम, तेलुगु और तमिल - कुल 12 भाषाओं में जारी किया गया है। इससे देश के कोने-कोने में तैनात सरकारी कर्मचारी अपनी सुविधानुसार इस पत्र को पढ़ सकेंगे और प्रधानमंत्री के संदेश को समझ सकेंगे। पीएम मोदी ने सिविल सेवकों को 'कर्मयोगी' कहकर संबोधित किया और कहा कि उन्होंने यह पत्र उन्हें एक बहुत ही विशेष समय पर लिखा है, क्योंकि भारत के कई हिस्सों में त्योहारों का मौसम है।
त्योहारों के बीच 'साधना सप्ताह' का संदेश
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में त्योहारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रोंगाली बिहू, विशु, पुथंडू, पोइला बोइशाख, महा बिशुबा पाना संक्रांति और बैसाखी के उत्साह से पूरा वातावरण सराबोर है। पीएम मोदी ने कहा कि ये त्योहार आशा और नई शुरुआत के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसे समय में, आप सीखने और विकास के एक उत्सव - 'साधना सप्ताह' का हिस्सा बन गए हैं। भारत के कोने-कोने से सिविल सेवकों को एक साथ लाने वाले इस अनूठे प्रयास का हिस्सा बनने के लिए मैं आपको बधाई देता हूं।'
'आईगॉट कर्मयोगी' प्लेटफॉर्म का महत्व
प्रधानमंत्री ने सरकारी कर्मचारियों को 'आईगॉट कर्मयोगी' (iGOT Karmayogi) जैसे प्लेटफॉर्म का खूब उपयोग करने का सुझाव दिया। यह एक ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म है, जिस पर सरकारी कर्मचारियों को एआई जैसी नई तकनीकों से अवगत कराया जा रहा है। इसके माध्यम से आवश्यक रिपोर्ट तैयार करने के तरीके भी सिखाए जा रहे हैं। इस प्लेटफॉर्म पर कई सारे कोर्स उपलब्ध हैं, जिन्हें करना कर्मचारियों के लिए अनिवार्य किया गया है। पीएम मोदी ने कहा कि इस दिशा में 'आईगॉट कर्मयोगी' जैसे मंचों के उपयोग से सीखने को आजीवन आदत बनाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, 'यह महत्वपूर्ण है कि सरकार की सेवाएं और कार्य संस्कृति इस ऐतिहासिक युग का अधिकतम लाभ उठाने के लिए अनुकूल हों।'
'कर्मयोगी' बनने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने सिविल सेवकों को 'कर्मयोगी' कहकर संबोधित करते हुए उनसे बेहतर बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, 'आप बेहतर बनने का चुनाव कर रहे हैं ताकि भारत बेहतर बन सके।' पीएम मोदी ने अपने पत्र के माध्यम से सरकारी कर्मचारियों को प्रेरित किया कि वे अपने कार्यों में उत्कृष्टता लाएं और जनता की सेवा को अपना परम कर्तव्य समझें। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी ही देश की सेवा की रीढ़ हैं और उनके समर्पण से ही देश विकास के पथ पर आगे बढ़ सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह पत्र सरकारी कर्मचारियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। इसमें उन्होंने न केवल 'नागरिक देवो भव' के सिद्धांत को अपनाने की बात कही, बल्कि आधुनिक तकनीकों को सीखने और आत्म-सुधार पर भी जोर दिया। पीएम मोदी ने कर्मचारियों को 'कर्मयोगी' बनने का संदेश देकर उनके मनोबल को बढ़ाया है। यह पत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश भर के सरकारी कर्मचारियों को एकजुट करने और उन्हें साझा लक्ष्य की ओर अग्रसर करने का एक सशक्त माध्यम है। इस पत्र के माध्यम से पीएम मोदी ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार जनता की सेवा और देश के विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

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