चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के पुनरुद्धार के लिए कार्यशाला आयोजित: सीवेज प्रबंधन योजना पर विशेषज्ञों ने किया मंथन


 

Workshop on sewage management plan for Mandakini river revival in Chitrakoot with officials, experts, and local citizens discussing STP installation and pollution control.


आस्था और पर्यावरण की नगरी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के कायाकल्प को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एक व्यापक सीवेज प्रबंधन योजना (Sewage Management Plan) तैयार करना था। कार्यशाला में जल संसाधन, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारियों के साथ-साथ पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया।


कार्यशाला के दौरान यह बताया गया कि मंदाकिनी नदी (जिसे पयस्विनी के नाम से भी जाना जाता है) चित्रकूट की जीवन रेखा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में शहर के बढ़ते शहरीकरण और अनुपचारित सीवेज के सीधे नदी में मिलने से इसकी जल गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। नदी के पुनरुद्धार के लिए यह आवश्यक है कि सीवेज के निपटान की एक स्थायी और प्रभावी व्यवस्था की जाए।


कार्यशाला में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की गई:


सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की स्थापना: शहर से निकलने वाले गंदे पानी को नदी में मिलने से पहले ट्रीट करने के लिए नए एसटीपी लगाने की योजना पर चर्चा हुई। फिलहाल शहर में एक ही एसटीपी कार्यरत है, जिसकी क्षमता अपर्याप्त है। नई योजना के तहत शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में तीन नए एसटीपी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है।


नालों का जीर्णोद्धार और इंटरसेप्शन: शहर के प्रमुख नालों को चिन्हित कर उनमें इंटरसेप्शन सिस्टम लगाने की बात कही गई, ताकि नालों का पानी सीधे एसटीपी तक पहुंचे और नदी में न मिले। कई नालों में अवैध कनेक्शन भी पाए गए हैं, जिन्हें चिन्हित कर बंद किया जाएगा।


तटीय क्षेत्र का विकास और ठोस कचरा प्रबंधन: नदी के तटों को सुंदर बनाने और उन पर ठोस कचरे के ढेर को हटाने के लिए कार्य योजना बनाई गई। नदी के किनारे नगर निगम द्वारा डस्टबिन और सामुदायिक शौचालयों की व्यवस्था करने का भी निर्णय लिया गया।


जन सहभागिता और जागरूकता: कार्यशाला में यह रेखांकित किया गया कि नदी को साफ रखने के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। नागरिकों को नदी में कचरा न डालने, तटों को स्वच्छ रखने और अवैध कनेक्शनों की सूचना देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।


मॉनिटरिंग सिस्टम: नदी की जल गुणवत्ता पर नियमित निगरानी के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने का प्रस्ताव रखा गया। इससे पानी में प्रदूषण का स्तर जांचा जा सकेगा और समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।


कार्यशाला के समापन पर एक कार्य योजना (Action Plan) तैयार की गई, जिसे जल्द ही राज्य सरकार और केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इस योजना में शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों तरह के कदम शामिल किए गए हैं। शॉर्ट टर्म में नालों की सफाई, अवैध कनेक्शनों को हटाने और तटों की साफ-सफाई को प्राथमिकता दी गई है। लॉन्ग टर्म में नए एसटीपी का निर्माण, इंटरसेप्शन सिस्टम और तटीय विकास कार्य शामिल हैं।


जिलाधिकारी ने कहा, "मंदाकिनी हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर है। इसके पुनरुद्धार के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। यह कार्यशाला उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"


नगर निगम आयुक्त ने बताया कि इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए केंद्र सरकार की 'नमामि गंगे' योजना के तहत भी धनराशि मांगी जाएगी। उन्होंने कहा कि जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी और उम्मीद है कि अगले दो वर्षों में मंदाकिनी नदी अपने पुराने स्वरूप में लौट आएगी।


कार्यशाला में उपस्थित विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि नदी में जलस्तर बढ़ाने के लिए वर्षा जल संचयन और नाले के पानी के उपचार के बाद पुन: उपयोग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, नदी के आसपास हरित पट्टी (Green Belt) विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया, जिससे मिट्टी का कटाव रुकेगा और पर्यावरण संतुलन बना रहेगा।


स्थानीय निवासियों ने इस पहल का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि सरकार की यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर भी लागू हो। उन्होंने कहा कि नदी में स्नान करना और पूजा-अर्चना करना उनके जीवन का अभिन्न अंग है, लेकिन बढ़ते प्रदूषण के कारण यह मुश्किल हो गया है। उन्हें उम्मीद है कि यह योजना नदी को फिर से स्वच्छ बनाएगी।



चित्रकूट में मंदाकिनी नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए आयोजित यह कार्यशाला एक सकारात्मक पहल है। इसमें बनाई गई सीवेज प्रबंधन योजना यदि सही ढंग से क्रियान्वित होती है, तो मंदाकिनी नदी की दशा और दिशा दोनों बदल सकती है। यह न केवल पर्यावरण बल्कि चित्रकूट की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम होगा।

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