बुंदेलखंड की गौरवशाली विरासत को संजोया 'ओरछाधीश' में, पांच वर्षों की साधना के बाद रामस्वरूप पांडे ने पूरा किया लेखन

'ओरछाधीश' ग्रंथ विमोचन: वृंदावन में साधु-संतों की मौजूदगी में भव्य समारोह | बुंदेलखंड इतिहास
📖 Culture & Heritage · Bundelkhand · Vrindavan
वृंदावन · 8 अप्रैल 2026 · Bundelkhand 24x7
🙏 शुभ समाचार
📖 'ओरछाधीश' ग्रंथ का वृंदावन में भव्य विमोचन — 8 अप्रैल 2026  •  रामस्वरूप पांडे की 5 साल की साधना  •  MP संस्कृति विभाग का सहयोग  •  बुंदेलखंड इतिहास की अमूल्य धरोहर  •  मलूक जयंती समारोह के अवसर पर  •  साधु-संतों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति  • 
ओरछाधीश ग्रंथ विमोचन समारोह — वृंदावन धाम, 8 अप्रैल 2026
📸 ओरछाधीश ग्रंथ विमोचन समारोह | वृंदावन धाम | मलूक जयंती 2026
🙏 Vrindavan · 8 April 2026
📖 ग्रंथ विमोचन वृंदावन धाम 8 अप्रैल 2026 बुंदेलखंड Heritage

'ओरछाधीश' ग्रंथ का
वृंदावन में भव्य विमोचन!

बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास को संजोने वाले 'ओरछाधीश' ग्रंथ का विमोचन वृंदावन धाम में भव्य आयोजन के साथ हुआ। मलूक जयंती समारोह के अवसर पर बड़ी संख्या में साधु-संतों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। इस ग्रंथ के लेखक हैं टीकमगढ़ के सेवानिवृत्त शिक्षक रामस्वरूप पांडे जिन्होंने 5 वर्षों की कठोर साधना से इसे तैयार किया। मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के सहयोग से यह ग्रंथ प्रकाशित हुआ।

📖 ओरछाधीश ग्रंथ 🙏 वृंदावन विमोचन ✍️ रामस्वरूप पांडे 🏛️ MP संस्कृति विभाग ⏳ 5 साल की साधना 🕌 ओरछा रामराजा
ग्रंथ — मुख्य तथ्य
5 वर्ष
लेखन
की साधना
2026
विमोचन वर्ष
वृंदावन धाम
MP Gov.
संस्कृति विभाग
सहयोग
दुर्लभ
पांडुलिपियां
इतिहास स्रोत

📜 'ओरछाधीश' — इस ग्रंथ में क्या है?

🔆 बुंदेलखंड के इतिहास की अमूल्य धरोहर — ओरछाधीश

🏰
ओरछा इतिहास
ओरछा के शासकों, किलों और धरोहरों का विस्तृत विवरण
🙏
रामराजा सरकार
ओरछा में भगवान राम को राजा के रूप में पूजने की अनूठी परंपरा
⚔️
वीरगाथाएं
बुंदेलखंड के वीर योद्धाओं की कहानियां और युद्ध गाथाएं
🎨
कला एवं वास्तुकला
बुंदेलखंड की अद्भुत स्थापत्य कला और चित्रकला
📚
साहित्य और परंपरा
बुंदेली साहित्य, लोककथाएं और सांस्कृतिक परंपराएं
🏛️
सांस्कृतिक विरासत
त्यौहार, रीति-रिवाज और बुंदेलखंड की जीवंत संस्कृति
🔍
दुर्लभ जानकारी
आमजन तक न पहुंची दुर्लभ ऐतिहासिक जानकारियां
🌐
ओरछा धाम महिमा
पूरे भारत में ओरछा धाम के धार्मिक महत्व का प्रचार

👤 ग्रंथ से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व

✍️
रामस्वरूप पांडे
लेखक · सेवानिवृत्त शिक्षक
ग्राम पंचायत आचार्य धाम
टीकमगढ़, MP
🙏
महंत राजेंद्र दास महाराज
मलूक पीठाधीश्वर महाराज
पुत्र — रामस्वरूप पांडे
लेखन के लिए आग्रह किया
📝
श्रीराम तिवारी
प्रधान संपादक
'ओरछाधीश' ग्रंथ
वीर भारत व्यास
📖
पीडी मिश्रा
सह-संपादक
तुलसी मानस भारती — प्रधान संपादक
महर्षि अगस्त्य वैदिक संस्थान अध्यक्ष
🏛️
शिवशेखर शुक्ला
अपर मुख्य सचिव
संस्कृति विभाग, भोपाल
MP सरकार
📢
राजेंद्र चतुर्वेदी
मलूक पीठाधीश्वर शिष्य
प्रकाशन समन्वयक
संस्कृति विभाग संपर्क

🙏 विमोचन समारोह में उपस्थित साधु-संत

🕌 वृंदावन धाम — मलूक जयंती विमोचन समारोह में उपस्थित महानुभाव

🙏
स्वामी शरण जी महाराज
श्रीराम हर्षण कुंज
अयोध्या धाम
🌸
श्री सीताराम महाराज
अयोध्या धाम
🐄
जगतगुरु अभिराम दास देवाचार्य
सुरभि गौवंश एवं पर्यावरण
संरक्षण संस्थान, ओरछा
🔱
महंत अनिरुद्ध दास महाराज
विमोचन समारोह में
उपस्थित
🌺
श्री राधेश्याम दास महाराज
विमोचन समारोह में
उपस्थित
👨‍🎓
द्वारका प्रसाद मिश्रा,
कमलेश मिश्रा, श्याम मोहन तिवारी
गणमान्य व्यक्ति

👑 ओरछा नरेश से मिली प्रेरणा

महंत राजेंद्र दास महाराज ने अपने पिता रामस्वरूप पांडे से बुंदेलखंड के इतिहास पर पुस्तक लिखने का लगभग 5 वर्ष पहले आग्रह किया था। इसी से प्रेरित होकर पांडे जी ने यह लेखन शुरू किया। अनेक इतिहासकारों और शिक्षाविदों से परामर्श लिया। दुर्लभ पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन किया। बुंदेलखंड के कोने-कोने का भ्रमण किया।

🏛️ MP संस्कृति विभाग का सहयोग

संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के निर्देशन में MP शासन के संस्कृति विभाग ने इस ग्रंथ के प्रकाशन में महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता प्रदान की। अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने प्रकाशन प्रक्रिया सुगम बनाई। यह सरकारी सहयोग बुंदेलखंड संस्कृति संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है।

💬 रामस्वरूप पांडे के शब्दों में

"

महाराज के कहने पर मैंने अनेक इतिहासकारों और शिक्षाविदों से साहित्य संग्रह किया और उनसे परामर्श लिया। इसके बाद 'ओरछाधीश' ग्रंथ का लेखन पूरा किया। यह ग्रंथ बुंदेलखंड के इतिहास की वह दुर्लभ जानकारियाँ प्रस्तुत करता है, जो आमतौर पर आमजन तक नहीं पहुँच पाती हैं। मेरी आशा है कि इससे श्री रामराजा सरकार ओरछा धाम की महिमा पूरे भारतवर्ष में प्रचारित होगी।

रामस्वरूप पांडे लेखक, 'ओरछाधीश' | सेवानिवृत्त शिक्षक, टीकमगढ़, MP

📰 पूरी खबर: 'ओरछाधीश' ग्रंथ विमोचन — वृंदावन धाम

वृंदावन, 8 अप्रैल 2026। बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास को संजोने वाले महत्वपूर्ण ग्रंथ 'ओरछाधीश' का विमोचन वृंदावन धाम में भव्य आयोजन के साथ किया गया। यह आयोजन मलूक जयंती समारोह के अवसर पर हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में साधु-संतों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। इस ग्रंथ के लेखन का कार्य टीकमगढ़ जिले के ग्राम पंचायत आचार्य धाम निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक रामस्वरूप पांडे ने किया है।

🙏 मलूक पीठाधीश्वर महाराज के आग्रह पर शुरू हुआ लेखन

रामस्वरूप पांडे मलूक पीठाधीश्वर महंत श्री राजेंद्र दास महाराज के पिता हैं। लगभग पांच वर्ष पहले महाराज ने उनसे बुंदेलखंड के इतिहास पर एक पुस्तक लिखने का आग्रह किया था। पांडे जी ने अनेक इतिहासकारों और शिक्षाविदों से साहित्य संग्रह किया और उनसे परामर्श लिया। उन्होंने बुंदेलखंड के कोने-कोने का भ्रमण किया, दुर्लभ पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन किया, और कई विद्वानों एवं इतिहासकारों से चर्चा की।

🏛️ मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग का महत्वपूर्ण योगदान

मलूक पीठाधीश्वर महाराज के शिष्य राजेंद्र चतुर्वेदी ने जानकारी दी कि मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के सहयोग से इस ग्रंथ का प्रकाशन किया गया है। संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के निर्देशन में संस्कृति विभाग, भोपाल के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने इस ग्रंथ को प्रकाशित कराया। विभाग ने न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की, बल्कि प्रकाशन की प्रक्रिया को भी सुगम बनाया।

📝 प्रधान संपादक श्रीराम तिवारी का योगदान

'ओरछाधीश' ग्रंथ के प्रधान संपादक श्रीराम तिवारी हैं। उनके कुशल निर्देशन में ग्रंथ का संपादन कार्य पूरा किया गया। इसके अलावा, पीडी मिश्रा ने संपादकीय कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पीडी मिश्रा तुलसी मानस भारती के प्रधान संपादक और महर्षि अगस्त्य वैदिक संस्थान के अध्यक्ष भी हैं। उनकी विशेषज्ञता ने इस ग्रंथ को और अधिक प्रामाणिक और समृद्ध बनाया।

📜 'ओरछाधीश' का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

'ओरछाधीश' नाम ही ओरछा के शासकों और वहाँ की रामराजा सरकार (भगवान राम को राजा के रूप में पूजे जाने की अनूठी परंपरा) से जुड़ा है। यह ग्रंथ बुंदेलखंड की वीरगाथाओं, सांस्कृतिक विरासत, कला, वास्तुकला, साहित्य और परंपराओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। विशेष रूप से, यह ओरछा के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को रेखांकित करता है।

🌟 बुंदेलखंड इतिहास संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

'ओरछाधीश' ग्रंथ का प्रकाशन बुंदेलखंड के इतिहास और संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन सभी महानुभावों ने रामस्वरूप पांडे के इस अथक प्रयास की सराहना की और कहा कि इस ग्रंथ से आने वाली पीढ़ियों को बुंदेलखंड के समृद्ध इतिहास को समझने में मदद मिलेगी। 'ओरछाधीश' बुंदेलखंड के गौरवशाली अतीत की एक अमूल्य धरोहर है — यह न केवल बुंदेलखंड की पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यटन, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा करेगा।

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