'ओरछाधीश' ग्रंथ का
वृंदावन में भव्य विमोचन!
बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास को संजोने वाले 'ओरछाधीश' ग्रंथ का विमोचन वृंदावन धाम में भव्य आयोजन के साथ हुआ। मलूक जयंती समारोह के अवसर पर बड़ी संख्या में साधु-संतों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। इस ग्रंथ के लेखक हैं टीकमगढ़ के सेवानिवृत्त शिक्षक रामस्वरूप पांडे जिन्होंने 5 वर्षों की कठोर साधना से इसे तैयार किया। मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के सहयोग से यह ग्रंथ प्रकाशित हुआ।
की साधना
वृंदावन धाम
सहयोग
इतिहास स्रोत
📜 'ओरछाधीश' — इस ग्रंथ में क्या है?
🔆 बुंदेलखंड के इतिहास की अमूल्य धरोहर — ओरछाधीश
👤 ग्रंथ से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व
ग्राम पंचायत आचार्य धाम
टीकमगढ़, MP
पुत्र — रामस्वरूप पांडे
लेखन के लिए आग्रह किया
'ओरछाधीश' ग्रंथ
वीर भारत व्यास
तुलसी मानस भारती — प्रधान संपादक
महर्षि अगस्त्य वैदिक संस्थान अध्यक्ष
संस्कृति विभाग, भोपाल
MP सरकार
प्रकाशन समन्वयक
संस्कृति विभाग संपर्क
🙏 विमोचन समारोह में उपस्थित साधु-संत
🕌 वृंदावन धाम — मलूक जयंती विमोचन समारोह में उपस्थित महानुभाव
अयोध्या धाम
संरक्षण संस्थान, ओरछा
उपस्थित
उपस्थित
कमलेश मिश्रा, श्याम मोहन तिवारी
👑 ओरछा नरेश से मिली प्रेरणा
महंत राजेंद्र दास महाराज ने अपने पिता रामस्वरूप पांडे से बुंदेलखंड के इतिहास पर पुस्तक लिखने का लगभग 5 वर्ष पहले आग्रह किया था। इसी से प्रेरित होकर पांडे जी ने यह लेखन शुरू किया। अनेक इतिहासकारों और शिक्षाविदों से परामर्श लिया। दुर्लभ पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन किया। बुंदेलखंड के कोने-कोने का भ्रमण किया।
🏛️ MP संस्कृति विभाग का सहयोग
संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के निर्देशन में MP शासन के संस्कृति विभाग ने इस ग्रंथ के प्रकाशन में महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता प्रदान की। अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने प्रकाशन प्रक्रिया सुगम बनाई। यह सरकारी सहयोग बुंदेलखंड संस्कृति संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
💬 रामस्वरूप पांडे के शब्दों में
महाराज के कहने पर मैंने अनेक इतिहासकारों और शिक्षाविदों से साहित्य संग्रह किया और उनसे परामर्श लिया। इसके बाद 'ओरछाधीश' ग्रंथ का लेखन पूरा किया। यह ग्रंथ बुंदेलखंड के इतिहास की वह दुर्लभ जानकारियाँ प्रस्तुत करता है, जो आमतौर पर आमजन तक नहीं पहुँच पाती हैं। मेरी आशा है कि इससे श्री रामराजा सरकार ओरछा धाम की महिमा पूरे भारतवर्ष में प्रचारित होगी।
📰 पूरी खबर: 'ओरछाधीश' ग्रंथ विमोचन — वृंदावन धाम
वृंदावन, 8 अप्रैल 2026। बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास को संजोने वाले महत्वपूर्ण ग्रंथ 'ओरछाधीश' का विमोचन वृंदावन धाम में भव्य आयोजन के साथ किया गया। यह आयोजन मलूक जयंती समारोह के अवसर पर हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में साधु-संतों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। इस ग्रंथ के लेखन का कार्य टीकमगढ़ जिले के ग्राम पंचायत आचार्य धाम निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक रामस्वरूप पांडे ने किया है।
🙏 मलूक पीठाधीश्वर महाराज के आग्रह पर शुरू हुआ लेखन
रामस्वरूप पांडे मलूक पीठाधीश्वर महंत श्री राजेंद्र दास महाराज के पिता हैं। लगभग पांच वर्ष पहले महाराज ने उनसे बुंदेलखंड के इतिहास पर एक पुस्तक लिखने का आग्रह किया था। पांडे जी ने अनेक इतिहासकारों और शिक्षाविदों से साहित्य संग्रह किया और उनसे परामर्श लिया। उन्होंने बुंदेलखंड के कोने-कोने का भ्रमण किया, दुर्लभ पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन किया, और कई विद्वानों एवं इतिहासकारों से चर्चा की।
🏛️ मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग का महत्वपूर्ण योगदान
मलूक पीठाधीश्वर महाराज के शिष्य राजेंद्र चतुर्वेदी ने जानकारी दी कि मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के सहयोग से इस ग्रंथ का प्रकाशन किया गया है। संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के निर्देशन में संस्कृति विभाग, भोपाल के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने इस ग्रंथ को प्रकाशित कराया। विभाग ने न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की, बल्कि प्रकाशन की प्रक्रिया को भी सुगम बनाया।
📝 प्रधान संपादक श्रीराम तिवारी का योगदान
'ओरछाधीश' ग्रंथ के प्रधान संपादक श्रीराम तिवारी हैं। उनके कुशल निर्देशन में ग्रंथ का संपादन कार्य पूरा किया गया। इसके अलावा, पीडी मिश्रा ने संपादकीय कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पीडी मिश्रा तुलसी मानस भारती के प्रधान संपादक और महर्षि अगस्त्य वैदिक संस्थान के अध्यक्ष भी हैं। उनकी विशेषज्ञता ने इस ग्रंथ को और अधिक प्रामाणिक और समृद्ध बनाया।
📜 'ओरछाधीश' का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
'ओरछाधीश' नाम ही ओरछा के शासकों और वहाँ की रामराजा सरकार (भगवान राम को राजा के रूप में पूजे जाने की अनूठी परंपरा) से जुड़ा है। यह ग्रंथ बुंदेलखंड की वीरगाथाओं, सांस्कृतिक विरासत, कला, वास्तुकला, साहित्य और परंपराओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। विशेष रूप से, यह ओरछा के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को रेखांकित करता है।
🌟 बुंदेलखंड इतिहास संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
'ओरछाधीश' ग्रंथ का प्रकाशन बुंदेलखंड के इतिहास और संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन सभी महानुभावों ने रामस्वरूप पांडे के इस अथक प्रयास की सराहना की और कहा कि इस ग्रंथ से आने वाली पीढ़ियों को बुंदेलखंड के समृद्ध इतिहास को समझने में मदद मिलेगी। 'ओरछाधीश' बुंदेलखंड के गौरवशाली अतीत की एक अमूल्य धरोहर है — यह न केवल बुंदेलखंड की पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यटन, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा करेगा।
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