राष्ट्रीय अध्यक्ष बोले– डबल इंजन सरकार ने बदली यूपी की तस्वीर, विकास और विरासत पर होगा चुनाव
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से करीब दो साल पहले ही भारतीय जनता पार्टी ने अपना रुख साफ कर दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने बुधवार को राजधानी लखनऊ में पार्टी की विस्तारित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद घोषणा की कि आगामी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में और उन्हीं के चेहरे पर लड़ा जाएगा।
नबीन ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा, “पिछले नौ वर्षों में डबल इंजन की सरकार ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, सड़क-एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट, मेडिकल कॉलेज, डिफेंस कॉरिडोर और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में जो काम किया है, उसने राज्य की तस्वीर बदल दी है। 2027 में भी जनता का आशीर्वाद भारतीय जनता पार्टी को ही मिलेगा और योगी आदित्यनाथ जी ही हमारे मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे।”
‘धूम-धड़ाके से लौटेगी सरकार’
बैठक में मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2027 में भी प्रदेश में डबल इंजन की सरकार “धूम-धड़ाके” से सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने विपक्षी समाजवादी पार्टी पर सीधा प्रहार करते हुए कहा, “पीडीए का नारा जनता की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास है। 2027 में आने का सपना विपक्ष छोड़ दे।”
योगी ने बीते मानसून सत्र में विधानसभा में पढ़ी गई पंडित श्याम नारायण पांडेय की कविता की पंक्तियां दोहराते हुए कहा, “ये महाकाल का आसन है, इस पर हर व्यक्ति नहीं बैठ सकता। यह सिंहासन स्वाभिमानी है, इसकी रक्षा के लिए कुर्बानी पर कुर्बानी है।”
संगठन को धार, छह क्षेत्रों में बंटा प्रदेश
भाजपा ने 2027 की तैयारी के लिए प्रदेश को छह संगठनात्मक क्षेत्रों – अवध, काशी, गोरखपुर, कानपुर, ब्रज और पश्चिम – में विभाजित कर संघ-भाजपा समन्वय बैठकें शुरू कर दी हैं। इन बैठकों में मुख्यमंत्री स्वयं मौजूद रहे। पार्टी का फोकस बूथ प्रबंधन, लाभार्थी संपर्क और सरकार की योजनाओं को घर-घर पहुंचाने पर है। मई 2026 से ‘गांव चलो, बस्ती चलो’ अभियान चलाया जाएगा।
टिकट वितरण में परफॉर्मेंस ही आधार
पार्टी सूत्रों के अनुसार, आंतरिक सर्वे में 100 से 115 मौजूदा विधायकों के टिकट पर संकट के बादल हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि 2027 में टिकट का एकमात्र आधार जिताऊ क्षमता, जमीन पर पकड़ और जनता के बीच स्वीकार्यता होगी। नए चेहरों और अन्य दलों से आए नेताओं को भी अवसर दिया जाएगा।
80-20 फॉर्मूला फिर चर्चा में
मुख्यमंत्री ने पूर्व में दिए गए 80-20 के सामाजिक समीकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ओबीसी, दलित, महिला और युवा वर्ग को विशेष प्रतिनिधित्व देगी। माना जा रहा है कि सपा के पीडीए की काट के लिए भाजपा जल्द ही किसी ओबीसी या दलित चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप सकती है।
शाह ने भी दिए संकेत
पिछले सप्ताह यूपी दिवस कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था, “2027 में भी यूपी में डबल इंजन सरकार बने, सीएम योगी ने खूब काम किया है।” दिल्ली में शाह और योगी के बीच हुई बैठक में नए प्रदेश अध्यक्ष तथा टिकट बंटवारे पर मंथन हुआ।
विपक्ष की तैयारियां
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी पीडीए यात्रा निकालकर महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक न्याय को मुद्दा बना रही है। वाराणसी में ‘संकल्प 2024, लक्ष्य 2027’ के पोस्टर लगाए गए हैं। प्रदेश में ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ बनाम ‘जुड़ेंगे तो बढ़ेंगे’ का पोस्टर वॉर भी शुरू हो गया है।
विशेषज्ञों की राय
लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. रमेश दीक्षित कहते हैं, “चेहरा घोषित कर भाजपा ने अपने कैडर को स्पष्ट संदेश दे दिया है। अब लड़ाई नैरेटिव की होगी। भाजपा विकास, हिंदुत्व और कानून-व्यवस्था पर फोकस करेगी, जबकि विपक्ष सामाजिक न्याय और स्थानीय मुद्दों को धार देगा।”
बहरहाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के चुनाव का बिगुल औपचारिक रूप से बज गया है।

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