झांसी। बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त इलाकों के लिए केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है। करीब 50 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना से झांसी की 17,488 हेक्टेयर असिंचित भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का रास्ता साफ होगा।
करीब 17 साल तक लंबित रहने के बाद इस परियोजना को वर्ष 2022 में केंद्र सरकार की मंजूरी मिली थी। परियोजना के तहत केन और बेतवा नदियों को जोड़ने के लिए 221 किलोमीटर लंबी लिंक नहर बनाई जाएगी, जो पन्ना के दौंधन बांध से झांसी के बरुआसागर बांध तक पानी पहुंचाएगी। परियोजना को 2035 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
झांसी में क्या होगा असर?
- जिले में करीब 21 किमी लंबी नहर का निर्माण
- 10 गांवों की 271 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण
- सालभर बांधों में पानी उपलब्ध रहने की संभावना
- खपरार और सपरार जैसे सूखे बांधों को सीधा लाभ
कुल सिंचाई लाभ (जिला वार)
- झांसी: 17,488 हेक्टेयर
- बांदा: 1,92,479 हेक्टेयर
- महोबा: 37,564 हेक्टेयर
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ललितपुर: 3,533 हेक्टेयर
कुल मिलाकर 2.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा
पेयजल और जल वितरण
- 66.77 MCM पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा
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उत्तर प्रदेश को: 17,000 लाख क्यूबिक मीटर पानी
- मानसून: 9,500
- गैर-मानसून: 7,500
- मध्य प्रदेश को: 23,500 लाख क्यूबिक मीटर पानी
अन्य प्रमुख कार्य
- पारीछा, बरुआसागर और बरियारपुर वीयर का उन्नयन – ₹350 करोड़
- बांदा केन नहर सुधार – ₹1191.51 करोड़
- महोबा के तालाब-बांध मरम्मत – ₹510 करोड़
- बांदा-पैलानी में 2 बैराज निर्माण – ₹2000 करोड़
क्या बदलेगा?
सिंचाई विभाग के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद अगले 10 वर्षों में खेती का स्वरूप बदलेगा, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में बड़ा इजाफा होगा।
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