दमोह: मध्य प्रदेश के दमोह जिले से सामने आया फर्जी MBBS डिग्री कांड अब बड़ा घोटाला बनता जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित स्वास्थ्य केंद्रों में नकली डिग्री के सहारे डॉक्टर बनकर काम करने वाले आरोपियों का नेटवर्क कई जिलों तक फैला हुआ पाया गया है।
जांच में सामने आया है कि कुछ आरोपियों ने करीब 10-10 लाख रुपये देकर फर्जी MBBS डिग्रियां हासिल कीं और उसी आधार पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में नौकरी पा ली। ये आरोपी पिछले दो साल से अधिक समय तक मरीजों का इलाज कर रहे थे और रोजाना 30-40 मरीजों को देख रहे थे, जिससे पूरे स्वास्थ्य तंत्र की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब स्वास्थ्य विभाग और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की रिपोर्ट के आधार पर दस्तावेजों की जांच की गई। जांच के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया, जिनमें कुमार सचिन यादव, राजपाल गौर और अजय मौर्य शामिल हैं।
जांच आगे बढ़ने पर यह भी सामने आया कि इस पूरे फर्जीवाड़े में एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो नकली डिग्री तैयार करने और सरकारी पोर्टल पर नियुक्ति प्रक्रिया में मदद करता था। इस सिलसिले में भोपाल से जुड़े एक रेडियोलॉजिस्ट और NHM से जुड़े आईटी कर्मी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में 2000 से ज्यादा डॉक्टरों की डिग्रियों की जांच की जा रही है, जिससे अंदेशा है कि यह घोटाला राज्य स्तर पर बड़ा नेटवर्क बन चुका है।
स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन और NHM की संयुक्त जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और पूरे सिस्टम में हुई लापरवाही की भी जांच की जा रही है।
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