चंबल घड़ियाल अभयारण्य में बढ़ते अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को तुरंत प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करना और खाली पड़े वन रक्षक पदों पर शीघ्र भर्ती करना बेहद जरूरी है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में बिना नंबर और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों से रेत परिवहन की मीडिया रिपोर्ट पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि यदि ये रिपोर्ट सही है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा अदालत में गलत जानकारी दी गई है।
अदालत ने तीनों राज्यों को प्रभावित क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने, कंट्रोल सेंटर स्थापित करने और मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए हैं। यह पूरी व्यवस्था छह महीने के भीतर लागू करने को कहा गया है। साथ ही अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों, खासकर फर्जी नंबर प्लेट या बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों को जब्त कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल ड्राइवर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि वाहन मालिकों, ठेकेदारों और पूरे नेटवर्क के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किए जाएं। इसके अलावा वन विभाग के कर्मचारियों पर बढ़ते हमलों पर चिंता जताते हुए फील्ड स्टाफ की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को यह भी सुझाव दिया कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम शुरू करने और उन्हें संरक्षण, वृक्षारोपण तथा इको-टूरिज्म गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में काम किया जाए।
करीब 5400 वर्ग किलोमीटर में फैला राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य तीन राज्यों में विस्तृत एक महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र है, जहां घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन और रेड क्राउन रूफ टर्टल जैसे दुर्लभ जीव पाए जाते हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अवैध खनन इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।

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