बुंदेलखंड की बेटी क्रांति गौड़ ने क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान लॉर्ड्स में इतिहास रच दिया है। 22 वर्षीय भारतीय महिला क्रिकेटर अब लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर नाम दर्ज कराने वाली पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि महिला क्रिकेट के लिए भी एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।
क्रिकेट के ‘मक्का’ कहे जाने वाले लॉर्ड्स मैदान पर कभी महिलाओं को खेलने तक की अनुमति नहीं थी, लेकिन अब उसी ऐतिहासिक मैदान पर क्रांति गौड़ ने अपनी शानदार गेंदबाजी से दुनिया का ध्यान खींचा। इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच में भारत ने 270 रन से जीत दर्ज की, जिसमें क्रांति ने पहली पारी में 5 विकेट और पूरे मैच में कुल 7 विकेट लेकर जीत में अहम भूमिका निभाई।
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के घुवारा गांव की रहने वाली क्रांति का सफर बेहद संघर्षों से भरा रहा है। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा। उनके पिता, जो पुलिस में कांस्टेबल थे, नौकरी छूटने के बाद भी बेटी के हौसले को कमजोर नहीं होने दिया।
क्रांति ने शुरुआती दिनों में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलकर खुद को साबित किया। कोच राजीव बिल्थरे के मार्गदर्शन में उन्होंने कठिन परिस्थितियों में ट्रेनिंग ली। रहने और खाने तक की व्यवस्था के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
गांव के लोगों के तानों और सामाजिक दबाव के बावजूद क्रांति का परिवार उनके साथ खड़ा रहा। उनकी मेहनत रंग लाई और वह पहले मध्य प्रदेश की जूनियर और सीनियर टीम में जगह बनाने के बाद भारतीय टीम तक पहुंचीं।
विश्व स्तर पर सफलता हासिल करने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई। उनके पिता की नौकरी बहाल हुई और क्रांति को भी सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गई। आज वह लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
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