बंगाल विजय पर कैलाश का बढ़ेगा कद, शिवराज होंगे संगठन का हिस्सा - राजनीतिक विशेषज्ञ अतुल मलिकराम

बंगाल चुनाव की खबरें न्यूज़ चैनल्स से लेकर अखबारों तक फ्रंट पेज पर जगह बना रही हैं। वजह भी ख़ास है, एक तरफ वो क्षेत्रीय राजनीतिक दल है जो दस साल से सत्ता में जगह बनाए हुआ है और दूसरी ओर एक राष्ट्रीय दावेदार, जो सत्तारूढ़ पार्टी को उखाड़ फेंकने का माद्दा रखता है। तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच चल रही चुनावी जंग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को कुरुक्षेत्र में तब्दील कर दिया है। 23 जिलों और 294 सीट वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में इस समय तृणमूल कांग्रेस के 211 विधायक हैं। जबकि बीजेपी के पास सिर्फ़ तीन विधायक ही हैं। बावजूद इसके अमित शाह और जे पी नड्डा मानते हैं कि इस बार करिश्माई रूप से उनकी पार्टी 200 से अधिक सीटें हासिल करने में कामयाब होगी। 

बंगाल विजय पर कैलाश का बढ़ेगा कद, शिवराज होंगे संगठन का हिस्सा - राजनीतिक विशेषज्ञ अतुल मलिकराम


इस विश्वास की वजह कैलाश हैं?

राजनीतिक विश्लेषज्ञ और ट्रूपल को-फाउंडर अतुल मलिकराम इस सवाल का जवाब मध्यप्रदेश के इंदौर से तलाशते हैं। मलिकराम के अनुसार, एक तरफ बीजेपी ने 2014 के बाद अपने ज्यादातर चुनाव, प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर ही जीते लेकिन 2016 के बंगाल विधानसभा चुनावों में उसे मुँह की खानी पड़ी। यहां पार्टी ने 291 सीट पर चुनाव लड़ा, जिनमें से 263 सीट पर उसके जमानत भी नहीं छुड़ा पाए। इसके बाद बंगाल की राजनीति में बीजेपी की तरफ से मुख्य धारा में दिखाई दिए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय। शुरू से ही बंगाल में पैठ जमाने की कोशिश में लगे कैलाश ने अपने कुशल नेतृत्व और रणनीति का परिणाम 2019 के लोकसभा चुनावों में दिया। 

वही बीजेपी, जिसने 2014 लोकसभा चुनावों में बंगाल की कुल 42 में से केवल 2 सीटें ही अपने नाम की थीं, उसने 2019 के लोकसभा चुनावों में 18 सीटें अपने नाम की। 2014 के मुकाबले 40.64 प्रतिशत वोट बैंक बढ़ने के पीछे वजह बेशक कैलाश ही थे।"  

इलेक्शन कैम्पेन लीडर के रूप में विजयवर्गीय के इस शानदार प्रदर्शन को देखते हुए भाजपा ने एक बार फिर उन्हें ही बंगाल फतह की जिम्मेदारी सौंपी है। और इस जीत का तोहफा उन्हें मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में मिलेगा। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि शिवराज का संगठन से लगाव पुराना है। और कमलनाथ की सरकार गिराने के बाद शिवराज ही मुख्यमंत्री होंगे ये चर्चा भी आम हो गई थी। वहीँ कैलाश विजयवर्गीय न सिर्फ इंदौर बल्कि प्रदेश के सभी शहरों में एक्टिव हैं। दिन प्रति दिन बढ़ती उनकी राजनीतिक सूझबूझ बीजेपी के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है। भले उनके भड़काऊ बयान या जनता के प्रति संवेदनशीलता इसकी वजह क्यों न हों।  


नड्डा की कमजोरी और शिवराज की लोकप्रियता 

मलिकराम के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष का तमगा नड्डा के नाम के साथ न्याय नहीं कर पा रहा है। खुद पार्टी के भीतर का एक धरा ये मानता है कि जी पी नड्डा आम जनता और कार्यकर्ता के बीच वो चार्म पैदा नहीं कर पा रहे जो अमित शाह का था। वहीँ अखिल भारतीय केशरिया वाहिनी के संयोजक, अखिल भारतीय जनता युवा मोर्चा के महासचिव, भाजपा के प्रदेश महासचिव, भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, मध्य प्रदेश में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जैसे पदों पर रह चुके लोकप्रिय शिवराज पर बीजेपी अब नया दाव खेलना चाहेगी और उन्हें अलग रोल में पार्टी की मजबूती का हिस्सा बनाया जाएगा।

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