Banner

बुंदेलखंड में बागियों ने बढ़ाई कांग्रेस-भाजपा की चुनौती, यूपी से सटे जिलों में सपा-बसपा का असर

MP Election: बुंदेलखंड में बागियों ने बढ़ाई कांग्रेस-भाजपा की चुनौती, यूपी से सटे जिलों में सपा-बसपा का असर

Bundelkhand news,  business men , election, congress , BJP, UP, budelkhand 24x7


बुंदेलखंड में कई सीटों के टिकट इस बार भी पूर्व सीएम उमा भारती की पसंद पर दिए गए हैं। उमा भारती के भतीजे राहुल सिंह लोधी शिवराज सरकार में मंत्री हैं और खरगापुर से मैदान में हैं। इस जिले की तीनों ही सीटें भाजपा के पास हैं। तीनों पर ही बागी मैदान में हैं।

ओंकारा फिल्म का गाना...धम-धम धड़म धड़ैया रे, सबसे बड़े लड़ैया रे.....याद ही होगा। बुंदेलों की धरती बुंदेलखंड में विधानसभा चुनाव इसी अंदाज में हो रहा है। प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शामिल बुंदेलखंड की ज्यादातर सीटों पर टिकट न मिलने पर बागियों ने बड़े-बड़े नेताओं की धुकधुकी बढ़ा दी है। लोगों की शिकायत है कि उनके वास्तविक मुद्दे कोई भी पार्टी नहीं उठा रही है।

बुंदेलखंड की अयोध्या कही जाने वाली ओरछा निवाड़ी जिले में है। यहां श्रीराम राजा के रूप में विराजमान हैं। शिवराज सिंह चौहान ने इस मंदिर को रामराजा लोक के रूप में विकसित करने का एलान किया है। नेगवा ढाबे पर मिले नरेंद्र प्रजापति कहते हैं कि बुंदेलखंड में पानी की समस्या सरकार ने दूर कर दी है। आवास और शौचालय तो मिले ही लाडली बहना और किसान सम्मान निधि मिलाकर 2250 रुपये महीने घर में आने लगे हैं। गैस सिलिंडर में भी राहत है। इसीलिए बाहर जाकर मजदूरी करने की जगह अपने घर का काम कर रहे हैं। वह कहते हैं कि बुंदेलखंड को अब हर खेत पानी की जरूरत है। अस्पताल की कमी दूर करने की जरूरत है।

टीकमगढ़ में रवि कुमार बताते हैं, बुंदेलखंड को जरूरत है अलग राज्य की। निवाड़ी में विश्वविद्यालय की। अलग मेडिकल कॉलेज की। बच्चों को विश्वविद्यालय में पढ़ाई के लिए सागर या झांसी जाना पड़ता है। रोजगार की बातें कोई नहीं करता। पन्ना के सावन सिंह कहते हैं कि यहां बड़ी आबादी अभी भी जाति पर वोट करती है।

सागर: मंत्री गोपाल भार्गव भी माने जा रहे सीएम पद के दावेदार

जिले की आठ में छह सीटें भाजपा और दो कांग्रेस के पास है। जिले से तीन बड़े विभागों वाले मंत्री हैं। इनमें पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव रहली से, नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह खुरई और राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत सुरखी से। तीन मंत्रियों में आपसी खींचतान चर्चा का विषय है। आठ बार से विधायक गोपाल भार्गव नौवीं बार मैदान में हैं। यहां कांग्रेस ने जिला पंचायत सदस्य ज्योति पटेल को मौका दिया है। गोपाल के बेटे अभिषेक पिता को सीएम पद का दावेदार बता रहे हैं। बंडा से भाजपा के वीरेंद्र सिंह लंबरदार और कांग्रेस के तरवर सिंह लोधी के बीच भाजपा के बागी सुधीर यादव तीसरे कोण हैं।

निवाड़ी: यूपी के पूर्व दबंग विधायक दीपनारायण की पत्नी मीरा ने चुनाव को बनाया चतुष्कोणीय

निवाड़ी में भाजपा विधायक अनिल जैन और कांग्रेस से अमित राय हैं। यहां यूपी के दबंग विधायक रहे दीप नारायण यादव की पत्नी मीरा यादव सपा प्रत्याशी हैं। यादव अच्छी संख्या में हैं। बसपा से अवधेश प्रताप सिंह राठौर हैं। यहां चतुष्कोणीय मुकाबले में भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशी की नींद उड़ी हुई है। पड़ोस की पृथ्वीपुर सीट पर भाजपा व सपा के यादव प्रत्याशियों के बीच जंग ने कांग्रेस के नरेंद्र राठौर की चुनौती कुछ कम की है। जिले की सभी सीटें अभी भाजपा के पास हैं।

टीकमगढ़: उमा भारती अस्वस्थ लेकिन सक्रिय

बुंदेलखंड में कई सीटों के टिकट इस बार भी पूर्व सीएम उमा भारती की पसंद पर दिए गए हैं। उमा भारती के भतीजे राहुल सिंह लोधी शिवराज सरकार में मंत्री हैं और खरगापुर से मैदान में हैं। टीकमगढ़ में मिले आशुतोष प्रताप ने बताया कि अस्वस्थ होने से उमा ज्यादा सभाएं नहीं कर पाई हैं। इस जिले की तीनों ही सीटें भाजपा के पास हैं। तीनों पर ही बागी मैदान में हैं।

दमोह: जयंत मलैया और टंडन फिर आमने-सामने

जिले की चार में से दो सीटें भाजपा तथा एक-एक कांग्रेस व बसपा के पास है। दमोह सीट से भाजपा ने 76 वर्षीय जयंत मलैया को उतारा है। उनके सामने कांग्रेस से पुराने प्रतिद्वंदी अजय टंडन हैं। पिछला चुनाव यहां कांग्रेस जीती थी। टंडन से हुए तीनों मुकाबलों में जयंत ही जीते हैं। जिले की चारों सीटों पर बागी हैं। पथरिया में बसपा प्रत्याशी ने त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है।

छतरपुर: सत्यव्रत साइडलाइन

कांग्रेस में सत्यव्रत चतुर्वेदी के साइडलाइन होने पर उनके बेटे सपा से चुनाव लड़े। इस बार पिता-पुत्र मैदान से बाहर हैं। सत्यव्रत के भाई छतरपुर से विधायक आलोक चतुर्वेदी कांग्रेस से फिर मैदान में हैं।  भाजपा से पूर्व मंत्री ललिता यादव हैं। 2018 में जिले की छह विधानसभा सीटों में से चार पर कांग्रेस व एक-एक पर भाजपा व सपा जीती थी। लेकिन सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद दो विधायक भाजपा को और मिल गए। अन्य चर्चित सीट राजनगर में भाजपा के बागी घासीराम पटेल ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है।

पन्ना: मंत्री बृजेंद्र को कांग्रेस से सीधी चुनौती

दो सीट भाजपा व एक कांग्रेस के पास है। पन्ना से खनिज संसाधन मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह मैदान में हैं। कांग्रेस से जिला उपाध्यक्ष भरत मिलन पांडेय हैं। सीधी लड़ाई है। पवई में भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी को कांग्रेस के मुकेश नायक से सीधी चुनौती मिल रही है। यहां दोनों ही दलों के बागी शांत हो गए हैं। गुन्नौर में भाजपा से बगावत कर सपा के टिकट पर बागी ने मुकाबले में संघर्ष बढ़ा दिया है।

यह भी पढ़ें:

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ