दतिया (मध्य प्रदेश): इतिहास प्रेमियों के लिए दतिया से एक बेहद अहम और रोमांचक खबर सामने आई है। दतिया म्यूजियम के अभिलेखागार में वर्षों से उपेक्षित पड़ी एक पेंटिंग को लेकर विशेषज्ञों ने बड़ा दावा किया है। उनका मानना है कि यह चित्र झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की अब तक की सबसे पुरानी और समकालीन छवि हो सकती है।
यह पेंटिंग प्राचीन कागज पर बनाई गई है और इसकी सबसे खास बात इसमें इस्तेमाल की गई सोने की धूल है, जो आज भी रोशनी में चमकती दिखाई देती है। यह विशेषता इसे और अधिक मूल्यवान और दुर्लभ बनाती है।
खोज कैसे हुई?
यह महत्वपूर्ण खोज ‘ज्ञान भारतम अभियान’ के तहत चल रहे आर्काइव कार्य के दौरान सामने आई। मध्य प्रदेश के पुरातत्व आयुक्त मदनकुमार नागरगोजे ने, जो पहले दतिया के कलेक्टर रह चुके हैं, वर्तमान कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े के साथ म्यूजियम में संरक्षित मराठा कालीन पेंटिंग्स पर चर्चा की। इसी दौरान इन अनदेखी कलाकृतियों को संरक्षण में लेने का प्रस्ताव रखा गया, जिसके बाद इस दुर्लभ चित्र की पहचान हुई।
इतिहास के लिए यह पेंटिंग क्यों महत्वपूर्ण है?
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी ऐतिहासिक व्यक्तित्व की समकालीन पेंटिंग मिलना उस दौर को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस पेंटिंग में रानी लक्ष्मीबाई को उनके पुत्र के गोद लेने के समारोह के दौरान दर्शाया गया है, जो इसे ऐतिहासिक और भावनात्मक रूप से और भी महत्वपूर्ण बना देता है।
यह खोज न केवल रानी लक्ष्मीबाई के वास्तविक स्वरूप की झलक दे सकती है, बल्कि 19वीं सदी के सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश को समझने में भी मददगार साबित हो सकती है।

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