Chitrakoot: 10 साल से ठप बस सेवा, 20 गांवों के लोग डग्गामार वाहनों के सहारे

चित्रकूट के पाठा इलाके में रहने वाले लोगों के लिए परिवहन बड़ी समस्या बनी हुई है। जिला मुख्यालय से देवांगना मार्ग के आस-पास बसे लगभग 20 से अधिक गांवों के लिए आज भी नियमित बस सेवा उपलब्ध नहीं है। दूसरे शहरों तक पहुंचना आसान है, लेकिन अपने ही घरों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। परिवहन विभाग ने इस रूट पर बस सेवा बंद करने का कारण कम सवारियों और बढ़ते घाटे को बताया है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि बस सेवा बंद होने से उनकी दैनिक दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित होती है।

10 साल से ठप रोडवेज सेवा, बढ़ी परेशानी

करीब 10 साल पहले परिवहन विभाग ने इस रूट पर बस सेवा शुरू की थी, जिससे ग्रामीणों को जिला मुख्यालय तक आने-जाने में काफी सुविधा मिली थी। लेकिन मात्र पांच महीने बाद ही विभाग ने अचानक इस सेवा को बंद कर दिया। तब से अब तक—पूरे एक दशक में—इस रूट पर फिर बस नहीं चलाई गई। जबकि देवांगना मार्ग से मारकुंडी गांव तक लगभग 21 किमी सड़क पूरी तरह दुरुस्त है और उसके दोनों ओर कई गांव बसे हुए हैं।

लोग जान जोखिम में डालकर करते हैं सफर

बस सेवा न होने का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। मजबूरन ग्रामीण डग्गामार वाहनों पर निर्भर हैं, जो अक्सर ओवरलोड रहते हैं और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते। बुजुर्ग, महिलाएं और छात्र प्रतिदिन जोखिम उठाकर जिला मुख्यालय तक पहुंचते हैं।

स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार और परिवहन विभाग जल्द से जल्द इस रूट पर फिर से रोडवेज बस सेवा शुरू करे, ताकि उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सके।

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