ओरछा (निवाड़ी जिला) मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी ओरछा में बन रही भव्य ‘राम लोक’ परियोजना (Ram Lok Project) अब विवादों में घिर गई है। बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा ने इस परियोजना में करीब 8 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए रामराजा सरकार मंदिर के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने भूमि घोटाले और सरकारी संपत्तियों की हेराफेरी का भी आरोप लगाया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रदर्शन का नेतृत्व और मुख्य आरोप
बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानू सहाय के नेतृत्व में रामराजा मंदिर के सामने हुए इस धरने-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राम लोक निर्माण कार्य में करीब 8 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता हुई है। मोर्चा के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों के संरक्षण में सरकारी संपत्तियों की हेराफेरी भी की गई है, जिससे पूरा मामला संदिग्ध हो गया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक धरोहर से भी जुड़ा हुआ है। ओरछा का रामराजा मंदिर न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहाँ लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में इस परियोजना में भ्रष्टाचार को लेकर उठ रहे सवालों ने आम जनता में रोष पैदा कर दिया है।
भूमि घोटाले और सरकारी संपत्तियों के हेरफेर के आरोप
प्रदर्शन के दौरान मोर्चा के पदाधिकारियों ने ओरछा में कथित भूमि घोटाले का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी जमीनों पर कब्जा कर उन्हें निजी उपयोग में लिया जा रहा है, जबकि प्रशासन द्वारा नियमानुसार सरकारी संपत्ति के बोर्ड भी नहीं लगाए गए। इससे लोगों को स्टे लेने का समय मिल गया, जो पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बनाता है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परियोजना में प्रयुक्त होने वाले निर्माण सामग्री की कीमतों में भी भारी अनियमितता है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और जांचों में यह बात सामने आई है कि बाजार में मात्र 52 रुपये प्रति वर्ग फीट में उपलब्ध होने वाले बलुआ पत्थर को सरकारी दस्तावेजों में 335 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से दर्ज किया गया है। यह मूल्य वृद्धि वास्तविक दर से लगभग 5-6 गुना अधिक है, जो सीधे तौर पर बड़े पैमाने पर वित्तीय धांधली की ओर इशारा करती है। कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने भी इस ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि लोक निर्माण विभाग (PWD) के मानकों के अनुसार पत्थर फिटिंग सहित लगभग 62.5 रुपये में उपलब्ध होना चाहिए, जबकि यहाँ 335 रुपये की दर तय कर नियमों का उल्लंघन किया गया है।
ईओडब्ल्यू या लोकायुक्त से जांच की मांग
प्रदर्शन के दौरान मोर्चा के पदाधिकारियों ने पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी जैसे ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) या लोकायुक्त से कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच की समय सीमा तय की जाए, ताकि सच्चाई जल्द से जल्द सामने आ सके। साथ ही, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई गई।
मोर्चा के महामंत्री अशोक सक्सेना, जगदीश तिवारी, प्रवक्ता रघुराज शर्मा, कोषाध्यक्ष वरुण अग्रवाल, हनीफ खान, प्रदीप झा, अभय कड़ा, बच्चू तिवारी सहित कई पदाधिकारी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
क्या है राम लोक परियोजना?
गौरतलब है कि श्रीराम राजा लोक परियोजना, ओरछा के ऐतिहासिक राम राजा मंदिर के पास विकसित किया जा रहा एक भव्य धार्मिक और पर्यटन स्थल है। इस परियोजना का कुल बजट लगभग 239 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य ओरछा को विश्व स्तरीय तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करना, मंदिर प्रांगण का विस्तार करना और पर्यटकों को रामकथा (विशेषकर बालकांड) का अनुभव कराना है। परियोजना के अंतर्गत 103 से अधिक नई दुकानें, पार्किंग क्षेत्र, एक विशाल प्रवेश प्लाजा, बालकांड और उत्तरकांड प्रांगण का निर्माण किया जा रहा है।
श्रद्धालुओं ने भी भ्रष्टाचार के विरोध में लगाए नारे
इस दौरान मंदिर दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं ने भी भ्रष्टाचार के विरोध में नारे लगाकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर इस प्रकार के भ्रष्टाचार से उनकी आस्था को ठेस पहुँचती है। उन्होंने सरकार से मामले की गंभीरता से जांच कराने और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की।
विपक्ष ने भी उठाया मुद्दा
इससे पहले, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने भी इस परियोजना में करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर शुरू हुई इस योजना का वास्तविक उद्देश्य भ्रष्टाचार को संरक्षण देना प्रतीत होता है। उन्होंने बुंदेलखंड की अगाध श्रद्धा के केंद्र ओरछा में विकास के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग को जनता और श्रद्धालुओं के साथ विश्वासघात बताया।
आगे की कार्यवाही पर टिकी हैं निगाहें
अब सभी की निगाहें इस मामले में प्रशासन और सरकार की ओर से होने वाली कार्यवाही पर टिकी हैं। बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया, तो वे अपना आंदोलन और तेज कर देंगे। इस पूरे प्रकरण ने न केवल ओरछा, बल्कि पूरे प्रदेश में एक बहस छेड़ दी है कि क्या धार्मिक स्थलों के विकास के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

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