कारण, जिन्होंने बुंदेलखंड के बांदा को बनाया आग का गोला!

बांदा: बुंदेलखंड का बांदा जिला इन दिनों भीषण गर्मी की मार झेल रहा है और देश के सबसे गर्म शहरों में शामिल हो गया है। हाल ही में यहां तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है और लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं।


विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति केवल मौसम की वजह से नहीं, बल्कि वर्षों से बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन का परिणाम है। जिले में हरियाली तेजी से खत्म हुई है, जलस्रोत सूख रहे हैं और अवैध खनन ने हालात को और गंभीर बना दिया है।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार, बांदा में रोजाना करीब 10 हजार ट्रक बालू और उतनी ही मात्रा में गिट्टी का खनन हो रहा है। बंबेश्वर पहाड़, जो कभी क्षेत्र की पहचान था, अब लगभग समाप्त हो चुका है। इसका सीधा असर स्थानीय जलवायु और तापमान पर पड़ा है।

पहले बांदा अपने तालाबों और कुओं के लिए जाना जाता था। यहां मोहल्लों के नाम भी इन्हीं जलस्रोतों पर आधारित थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। जिले में करीब 3 हजार कुएं सूख चुके हैं और कई छोटी नदियां समाप्ति के कगार पर हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि घटती हरियाली और जलस्तर के कारण बांदा “हीट आइलैंड” में बदलता जा रहा है। पहले पेड़-पौधे, नदियां और तालाब तापमान को संतुलित रखते थे, लेकिन अब इनके अभाव में गर्मी का प्रभाव कई गुना बढ़ गया है।

आंकड़ों के अनुसार, बांदा के 105 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अब केवल 3 प्रतिशत हरित क्षेत्र बचा है, जो अन्य जिलों की तुलना में बेहद कम है। यही कारण है कि यहां की प्राकृतिक ठंडक लगभग खत्म हो चुकी है।

अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में हालात और भयावह हो सकते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि बड़े स्तर पर पौधरोपण, जल संरक्षण, पारंपरिक जलस्रोतों का पुनर्जीवन और अवैध खनन पर सख्ती बेहद जरूरी है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ