बांदा। सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के दावों के बीच बांदा से व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। नरैनी तहसील क्षेत्र के स्योढ़ा गांव निवासी दोनों पैरों से दिव्यांग बृजभूषण पिछले कई वर्षों से राशन कार्ड बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायत और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद अब तक राशन कार्ड नहीं बन सका।
दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, बृजभूषण लंबे समय से राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और दोनों पैरों से दिव्यांग होने के कारण उनके लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल है।
एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भेजे जाते रहे
बृजभूषण का कहना है कि वह राशन कार्ड बनवाने के लिए कभी ब्लॉक कार्यालय तो कभी तहसील और जिला स्तर के अधिकारियों के पास पहुंचते रहे। हर बार उन्हें जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया गया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने समाधान दिवस सहित कई मौकों पर अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखी। इसके बावजूद राशन कार्ड नहीं बन पाया। दोनों पैरों से दिव्यांग होने के कारण एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक पहुंचना भी उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
डीएम कार्यालय पहुंचकर लगाई गुहार
लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद बृजभूषण अपनी फरियाद लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी परेशानी बताते हुए राशन कार्ड बनवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनके पास आय का कोई ठोस साधन नहीं है और सरकारी राशन उनके परिवार के लिए बेहद जरूरी है।
बृजभूषण की शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। सिटी मजिस्ट्रेट दिनेश चंद्र ने जिला पूर्ति अधिकारी को मामले की जांच कर जल्द राशन कार्ड बनवाने के निर्देश दिए हैं।
पेंशन बंद होने से भी बढ़ी परेशानी
राशन कार्ड की समस्या के साथ बृजभूषण ने पेंशन बंद होने की शिकायत भी की है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक उनकी पेंशन करीब नौ महीने से बंद है। ऐसे में राशन और पेंशन दोनों का लाभ नहीं मिलने से उनके सामने आर्थिक संकट और गहरा गया है।
अब कार्रवाई का इंतजार
मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद राशन कार्ड बनाने के निर्देश दिए गए हैं। अब देखना होगा कि वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे दिव्यांग बृजभूषण को वास्तव में कब तक राशन कार्ड और पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाता है।
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि जब एक जरूरतमंद व्यक्ति वर्षों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाता रहे, तो जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही कितनी प्रभावी है।

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