महरौनी रामलीला में भावुक हुआ भरत मिलाप का प्रसंग, श्रीराम को मनाने चित्रकूट पहुंचे भरत

ललितपुर। महरौनी में श्री रामयश कीर्तन मंडली के तत्वावधान में आयोजित रामलीला महोत्सव के नौवें दिन भरत मिलाप और पंचवटी प्रवास की लीला का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम और भरत के मिलन, अयोध्या लौटने की विनती और चरण पादुकाएं लेकर वापस लौटने के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। रामलीला देखने पहुंचे लोगों ने कलाकारों के अभिनय की सराहना की। 



पिता की मृत्यु और राम के वनवास का समाचार सुन शोक में डूबे भरत

रामलीला के पहले दृश्य में भरत को अपने पिता राजा दशरथ की मृत्यु और भगवान श्रीराम के वनवास की जानकारी मिलती है। यह समाचार सुनकर भरत शोक में डूब जाते हैं। पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिलने के बाद वह अपनी माता कैकेयी के निर्णय पर नाराजगी जताते हैं।

इसके बाद भरत राजपाट का त्याग कर भगवान श्रीराम को वापस अयोध्या लाने के लिए अवधवासियों के साथ वन की ओर प्रस्थान करते हैं।

चित्रकूट में हुआ राम-भरत मिलाप

रामलीला के सबसे भावुक प्रसंग में चित्रकूट में भगवान श्रीराम और भरत का मिलन दिखाया गया। भरत अपने पिता की मृत्यु का समाचार श्रीराम को देते हैं और उनसे अयोध्या लौटकर राजकाज संभालने की विनती करते हैं। हालांकि, श्रीराम पिता के वचन का पालन करते हुए 14 वर्ष का वनवास पूरा होने से पहले अयोध्या लौटने से इनकार कर देते हैं।

अंततः भरत भगवान श्रीराम की चरण पादुकाएं अपने सिर पर रखकर अयोध्या लौटते हैं। वहां वह चरण पादुकाओं को राजगद्दी पर स्थापित कर स्वयं सेवक और प्रतिनिधि के रूप में राजकाज संभालने का संकल्प लेते हैं। इस प्रसंग ने दर्शकों को त्याग, भाईचारे और कर्तव्यपालन का संदेश दिया।

पंचवटी प्रवास की लीला का भी हुआ मंचन

भरत मिलाप के बाद रामलीला में जयंत की कुटिलता के प्रसंग का मंचन किया गया। इसके बाद भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के वन भ्रमण को दर्शाया गया। इस दौरान वे अनुसूया, महर्षि अत्रि, शरभंग, सुतीक्ष्ण और अगस्त्य सहित विभिन्न ऋषि-मुनियों से भेंट करते हैं। आगे चलकर तीनों पंचवटी में प्रवास करते हैं। इसी के साथ रामलीला महोत्सव के नौवें दिन की लीला का समापन हुआ।

अतिथियों ने उतारी आरती, कलाकारों ने किया शानदार अभिनय

लीला मंचन से पूर्व परंपरा के अनुसार आरती की गई। प्रथम आरती अखंड धाम आश्रम के महात्मा अघट युक्ति आनंद और चेतन युक्ति आनंद के प्रतिनिधि बृजेन्द्र सिंह पप्पू राजा, विपिन पांडेय के सुपुत्र कार्तिकेय पांडेय और संदीप साहू मड़ावरा ने उतारी।

मध्यक्रम की आरती का सौभाग्य उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ (मन्नू कोरी), अरविंद सिंह रजऊ राजा मैंगुवां और पूर्व प्रधान राजीव दुबे नैनवारा को प्राप्त हुआ।

रामलीला के विभिन्न प्रसंगों में आदर्श उदैनिया, रुद्रांश भोंडेले, अथर्व चतुर्वेदी, डुग्गू गोस्वामी, उदय बिरथरे, सूर्या नायक, विवेक तिवारी, हर्ष तिवारी, बलराम परिहार, सूर्यकांत त्रिपाठी, हरवंश रिछारिया, अनुज भोंडेले, भगवत भोंडेले, दिनेश राय, दिव्यांश खरे, सत्येंद्र भर्ता, ओमकार सिंह, अखिलेश सोनी और देवांश तिवारी सहित अन्य कलाकारों ने सराहनीय अभिनय किया।

रामलीला महोत्सव के माध्यम से कलाकारों ने भगवान श्रीराम के आदर्शों, भरत के त्याग और भाइयों के बीच प्रेम की भावना को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

रिपोर्ट: ऋषि तिवारी, पत्रकार, महरौनी (ललितपुर)

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