ललितपुर। जड़ी-बूटी कारोबार में वन निगम की लचर कार्यप्रणाली का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। वन निगम ने किसानों से सीधे खरीद के लिए कोई सेंटर नहीं खोला है, इससे किसानों को बिचौलियों को जड़ी बूटी बेचनी पड़ रही है। इससे उन्हें इसका उचित दाम नहीं मिल रहा है।
घने जंगल होने के कारण यहां वनों पर आधारित जड़ी-बूटियों का व्यापक कारोबार है। लेकिन, इसके लिए वन निगम ने कोई भी रणनीति तैयार नहीं की है। यही कारण है कि दोहन करने वाले किसानों को जड़ी-बूटी का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। आज भी किसानों को जड़ी-बूटी औने-पौने दामों पर बिचौलियों को बेचनी पड़ रही है। जबकि, व्यापारी इसका पूरा लाभ उठा रहे हैं। इस दोहन में अधिकांश सहरिया आदिवासी शामिल हैं। वनों के आसपास के ग्रामीण भी यह कार्य करते हैं। जिलाधिकारी ने समूह के माध्यम से जड़ी-बूटी संग्रह की रूपरेखा तैयार करने के वन निगम को निर्देश दिए थे। लेकिन, वन निगम ने इस पर कोई कार्य नहीं किया।
साभार : अमर उजाला

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